ओला-ऊबर के बाजार में स्वदेशी ‘भारत ब्रांड लेगा’ इंट्री

ओला-ऊबर के बाजार में स्वदेशी ‘भारत ब्रांड लेगा’ इंट्री

सहकारी प्रयासों से होगा कैब सेवा का संचालन

मार्केंटिंग के लिए आईआईएम बेंगलुरू का साथ

देश की 8 बड़ी सहकारी संस्थाओें ने हाथ बढ़ाया

सहकारी कैब कोऑपरेटिव करेगा सेवा का संचालन

………………….

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सहकारिता को समृद्धि का रास्ता बताते हुए सहकार से समृद्धि का नारा दिया था। गृह मंत्री अमित शाह को सहकारिता मंत्रालय का प्रभार सौंप कर उन्होंने यह जाहिर करने का प्रयास किया कि वे सहकार को लेकर काफी गंभीर हैं। सहकारिता मंत्री अमित शाह ने हाल ही में एक राष्ट्रीय सहकारी नीति का ऐलान करते हुए बताया था कि 2025 के अंत तक एक कैब सेवा शुरू की जाएगी। अब वह योजना तेजी से आकार लेती दिख रही है।  

सहकारी प्रयासों से कैब सेवा

प्रधानमंत्री की इस पहल की घोषणा के क्रम में भारत का सहकारी क्षेत्र इस साल के अंत तक एक नई कैब सेवा शुरू करने जा रहा है। यह सेवा देश में ओला और ऊबर जैसी बड़ी कंपनियों को सीधी चुनौती देगी। इसे भारत ब्रांडके नाम से शुरू किया जाएगा और इसका उद्देश्य यात्रियों को किफायती, सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण परिवहन सेवा उपलब्ध कराना है। 

संचालन करेगा सहकारी कैब कोऑपरेटिव 

इस नई कैब सेवा की शुरुआत सहकारी कैब कोऑपरेटिव लिमिटेड नामक एक बहु-राज्य सहकारी संस्था के द्वारा की जा रही है। यह संस्था 6 जून को पंजीकृत हुई है और इसे 300 करोड़ रुपये की अधिकृत पूंजी मिली है।

देश की 8 प्रमुख सहकारी समितियां साथ आईं

इस सहकारी संस्था में देश की आठ प्रमुख सहकारी समितियां शामिल हैं। इसमें राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (NCDC),  भारतीय कृषक उर्वरक सहकारी लिमिटेड (इफको), गुजरात सहकारी दुग्ध विपणन संघ (अमूल /GCMMF), कृषक भारती सहकारी लिमिटेड (कृभको),
राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड), राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (NDDB), राष्ट्रीय सहकारी निर्यात लिमिटेड (NCEL) जैसी नामी-गिरामी सहकारी संस्थाएं शामिल हैं।  यह कैब सेवा पूरी तरह से सहकारी समितियों द्वारा संचालित और वित्त पोषित होगी। इसमें सरकार की कोई सीधी भागीदारी नहीं है।

राइड हेलिंग ऐप तैयार किया जाएगा

इस सेवा को संचालित करने के लिए एक राइड-हेलिंगऐप विकसित किया जा रहा है। इसके लिए टेक्नोलॉजी पार्टनर की तलाश की जा रही है। उम्मीद है कि, कुछ ही दिनों में टेक पार्टनर को अंतिम रूप दे दिया जाएगा और दिसंबर 2025 तक ऐप को तैयार कर लिया जाएगा। 

आईआईएम बैंगलुरू  करेगा मार्केटिग


इस ऐप की मार्केटिंग रणनीति तैयार करने के लिए देश के प्रमुख प्रबंधन संस्थान आईआईएम-बेंगलुरु और एक टेक सलाहकार की मदद ली जा रही है। यह सेवा एक सहकारी मूल्य निर्धारण मॉडल (Cooperative Pricing Model) पर काम करेगी, जिससे ग्राहक और ड्राइवर दोनों का फाय़दा होगा। 

सहकारी मॉडल का फायदा

सहकारी मॉडल का सबसे बड़ा लाभ यह होता है कि इसमें किसी भी संस्था या उत्पाद पर किसी एक व्यक्ति या कंपनी का स्वामित्व नहीं होता, बल्कि सभी सहभागी सदस्य मिलकर इसका संचालन करते हैं और मुनाफे का बंटवारा भी मिल-बांट कर किया जाता है। इस नई कैब सेवा में भी यही मॉडल अपनाया जाएगा इसमें ड्राइवरों को बेहतर पारिश्रमिक, बीमा और अन्य सुविधाएं मिलेंगी। साथ ही यात्रियों को भी पारदर्शिता और किफायती सेवा मिलेगी। यह पहल एक ऑल इंडिया प्लेटफॉर्म के रूप में शुरू की जा रही है और इसमें सदस्यता अभियान भी चलाए जा रहे हैं, ताकि ज्यादा से ज्यादा सहकारी संस्थाएं इसमें हिस्सेदार बनें। 

सहकार से समृद्धि का मूलमंत्र

देश के अधिकतर शहरों में जहां भी कैब सेवाएं चल रही हैं वहां ओला और ऊबर की सेवाएं ही सबसे ज्यादा हैं। उनका एक जमा-जमाया बाजार है। दिक्कत यह है कि, इन कंपनियों का भारत में न तो कोई ऑफिस है और न ही कोई शिकायत सेल। उपभोक्ता को जो भी करना है वह सिर्फ उनके ऐप पर ही कर सकता है। यहां तक कि इस सेवा से जुड़े ड्राइवरों को भी काफी परेशानी झेलनी पड़ती है। अगर भारत ब्रांड की कैब सेवा बेहतरीन सेवा उपलब्ध कराती है तो निश्चित तौर पर देश में लोग इस कैब सेवा का फायदा उठाना चाहेंगे।