जुबान पर ‘गारंटी’ लेकिन कागज़ पर ‘वॉरंटी’ जरूरी है अनुबंध की बारीकी को समझना

जुबान पर ‘गारंटी’ लेकिन कागज़ पर ‘वॉरंटी’ जरूरी है अनुबंध की बारीकी को समझना

गारंटी में मियादी अवधि में खराब सामान को बदलना होगा

गागंटी में दूसरा सामान या पैसा वापस लिया जा सकता है 

वारंटी में केवल नुकसान की क्षतिपूर्ति का दावा संभव

वारंटी की अवधि बीतने पर अनुबंध खत्म हो जाता है

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आजकल बाजार में आप कोई भी सामान लेने जाते हैं तो आपको सामान पर गारंटी नहीं वॉरंटी मिलती है। नया उपभोक्ता संरक्षण कानून के आने के बाद उपभोक्ता में भरोसे और सुरक्षा का भाव बढ़ाने के लिए कई तरह के नए नियम बनाए गए लेकिन यह सही है कि बाजार के बदलते तेवर ने गारंटी के बदले वॉरंटी को मजबूत किया है।   

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जब भी हम कोई वस्तु बाजार से खरीदते हैं तो हमारा दुकानदार से यही सवाल रहता है कि इसमें कितने समय की गारंटी है ? सामान खराब निकला तो बदला जाएगा कि नहीं ? दुकानदार भी रटा रटाया जवाब दे देता है। आमतौर पर उपभोक्ता को गारंटी और वारंटी के बारे में ठीक से पता ही नहीं होता। 

गारंटी क्य़ा है ? 

सेल आफ गुड्स एक्ट-1930 में दी गई वारंटी की परिभाषा के अनुसार, यह खरीदार और विक्रेता के बीच के भरोसे की सशर्त प्रतिभूति है जिसे तोड़े जाने पर क्षतिपूर्ति के दावे का खरीदार का अधिकार बनता है, लेकिन यह खरीदे गए सामान को निरस्त करने का अधिकार नहीं देती । इस अधिनियम में की गई गांरटी की परिभाषा के अनुसार, किसी वस्तु में पाए गए किसी दोष या खराबी की स्थिति में विक्रेता, निर्माता जिसे थर्ड पार्टी कहा गया है, के वादे या उत्तरदायित्व को पूरा करेगा। इसका सीधा सा मतलब यह है कि सामान खरीदने के बाद बिना किसी अतिरिक्त आर्थिक भार के खरीदार को निर्माता निशुल्क सेवा दे एवं इस बारे में उपभोक्ता के सामने आने वाली किसी भी तरह की दिक्कत में निर्माता उसकी मदद करे ।

इन परिभाषाओं से साफ है कि गारंटी अवधि में यदि किसी वस्तु में कोई खराबी पाई जाती है तो उपभोक्ता को उस वस्तु को बदल कर नई लेने का अधिकार मिलता है।

वॉरंटी क्या है ?

वारंटी में बात थोड़ी अलग है। वारंटी में उपभोक्ता  केवल नुकसान या क्षति का दावा ही कर सकता है, यह अवधि समाप्त होने पर निर्माता और खरीदार के बीच कोई लिखित अनुबंध नहीं रह जाता है, जब तक कि कुछ अतिरिक्त शुल्क देकर सेवा के लिए इसका नवीनीकरण भी नहीं किया जा सकता है।

इलेक्ट्रॉनिक वस्तुओं पर अधिकांश निर्माता अधिकतम एक साल की वारंटी देते हैं, इसमें भी बल्ब, स्विच आदि पर कोई वारंटी नहीं होती है, इलेक्ट्रॉनिक वस्तुओं के निर्माता खरीदार को एक वारंटी कार्ड देते हैं जिसे एक निर्धारित समय में खरीदार को दस्तखत कर कंपनी को वापस भेजना होता है, ऐसा न करने पर खरीदार एक वर्ष की वारंटी अवधि का भी अपना अधिकार खो बैठता है ।

ज्यादातर खरीदार इस ओर ध्यान नहीं देते और गारंटी एवं वारंटी कार्ड घर में लापरवाही से रख देते हैं, जरूरत के समय पर ढूंढने पर भी ये कार्ड नहीं मिलते, इस दशा में खरीदार अपने सभी प्रकार के अधिकारों से हाथ धो बैठता है ।

वारंटी को लेकर समय समय पर उपभोक्ता मंचों ने अपने विचार सामने सामने रखे हैं और इस विषय पर उपभोक्ता को निर्देशित करने का प्रयास किया है। उपभोक्ता मंचों ने मोटे तौर पर वारंटी की बारे में अपनी राय स्पष्ट करते हुए कहा है कि,  वारंटी अवधि में निर्माता को अपने उत्पाद का दोष दूर करना होगा। यदि दोष सुधारने के बाद भी उत्पाद ठीक से काम न करे तो उसके बदले में उसे नई वस्तु उपभोक्ता को देनी होगी या वह उपभोक्ता के पैसे लौटाएगा।

इस विषय में ढेरों मामलों में उपभोक्ता फोरमों ने उत्पादकों को अपने फैसलों से संकेत देने का प्रयास किया है। एक मामला  मेरा इंटरप्राईजेज बनाम राजगोपाल नाएडू का है जिसमें लगातार मरम्मत के बाद भी टेलीविजन के ठीक काम न करने पर उपभोक्ता फोरम ने उपभोक्ता को नया टेलीविजन बदल कर देने के आदेश जारी किए। इस मामले में आंध्रप्रदेश राज्य उपभोक्ता आयोग ने भी जिला उपभोक्ता फोरम के आदेश को सही ठहराते हुए टेलीविजन देने को कहा।

वारंटी या गारंटी का लाभ लेने के लिए कैसे शिकायत करें ?

खरीदी गई वस्तु की खराबियों का वर्गीकरण किया गया है इसलिए उपभोक्ताओं को यह भी देखना होगा कि वे अपनी शिकायत में क्या लिखें।  वाइट लाइन अप्लायंसेज बनाम श्रीमती सुधा प्रसाद के मामले में शिकायत ठीक से दर्ज न किए जाने के कारण दिल्ली राज्य उपभोक्ता आयोग ने वाशिंग मशीन बदल कर देने का सुधा प्रसाद का आवेदन अस्वीकार कर दिया था, लेकिन कंपनी को मशीन का वारंटी समय 6 माह से बढ़ा कर एक साल करने का आदेश दिया था।

इस मामले में सुधा प्रसाद ने वाइट लाइन अप्लाएंसेज के पास शिकायत भेजी थी कि उनकी वाशिंग मशीन ठीक से काम नहीं रही है, मशीन में खराबी क्या है, इसका स्पष्ट उल्लेख न कर उन्होंने केवल इतना दर्शाया था कि मशीन बहुत ज्यादा आवाज करती है।  उनकी शिकायत पर मैकेनिक ने घर जाकर मशीन को ठीक किया था। लेकिन सुधा प्रसाद ने दोबारा वही शिकायत लिखाई कि मशीन ठीक से काम नहीं कर रही। ठीक से शिकायत दर्ज न किए जाने से उपभोक्ता को वांछित लाभ नहीं मिल सका ।

वारंटी अवधि में बदल कर दी गई वस्तुओं के बारे में एक रोचक तथ्य सामने आया है कि उपभोक्ता द्वारा वस्तु खरीदने के बाद वारंटी अवधि के 2-3 सालों में अगर उसमें कोई खराबी नहीं आती तो फिर अंत तक उसमें कोई खराबी नहीं पाई जाती।

उपभोक्ता के लिए समझ जरूरी

बेचा गया सामान बदलना न पड़े इसके लिए कंपनियां अपने उत्पाद के उपयोग के तरीकों पर बचाव में कुछ तर्क देती हैं कि उत्पाद का उपयोग घरेलू काम के लिए किया गया है या व्यावसायिक उदेश्य से। व्यावसायिक उदेश्य से वस्तु का उपयोग करने पर भी कई मामलों में राज्य आयोग एवं राष्ट्रीय उपभोक्ता आयोग ने उपभोक्ता को केवल उपभोक्ता मान कर कंपनियों के खिलाफ आदेश दिए हैं ।

वारंटी अवधि समाप्ति के बाद उपभोक्ता को निशुल्क सेवा का अधिकार नहीं रह जाता है उसे वस्तु की मरम्मत के लिए अलग से भुगतान करना पड़ता है या नया सेवा अनुबंध भरना पड़ता है। गोदरेज बनाम सत्येन्द्र सिंह सोबती के मामले में शिकायतकर्ता ने अपने फ्रिज के बाबत लुधियाना जिला फोरम में शिकायत दर्ज करवाया दोनों पक्षों को सुनने के बाद फोरम ने यह फैसला दिया कि निर्माता उत्तरदायी नहीं है क्योकि वारंटी का समय बहुत पहले खत्म हो गया है। इस फैसले के खिलाफ शिकायतकर्ता ने पंजाब राज्य फोरम में जिला फोरम के आदेश को चुनौती दी, राज्य फोरम ने अपने आदेश में जिला फोरम के आदेश को उलट दिया और कहा कि निर्माता सील्ड पार्ट्स में एक साल और अन्य पार्ट्स में 5 साल की वारंटी देता है।  यह गलत है, आखिरकार यह मामला राष्ट्रीय उपभोक्ता आयोग में पहुंचा जिसमें राष्ट्रीय आयोग ने राज्य आयोग को गलत ठहराया और कहा कि वारंटी खत्म होने के बाद उपभोक्ता को लाभ नहीं मिल सकता अगर उसने नए सिरे से नया सर्विस अनुंबध नहीं करवाया है तो। ।

आपको क्या करना चाहिए ?

इन फैसलों से साफ पता चलता है कि उपभोक्ता को गारंटी एवं वारंटी के बीच का भेद समझ लेना चाहिए तथा उसी कंपनी का माल खरीदने की कोशिश करनी चाहिए जो ज्यादा लंबी अवधि की गारंटी देती है। इसीलिए अगली बार जब आप अपने लिए कोई रेफ्रिजरेटर, म्यूजिक सिस्टम या वाशिंग मशीन जैसे सामान खरीदने जाएं तो वारंटी एवं गारंटी के छोटे-छोटे बिंदुओं को भी बारीकी से पढें और गारंटी कार्ड और रसीद को संभाल कर रखें । ऐसा करने से आप भविष्य में होने वाली परेशानियों से काफी हद तक बच सकते हैं।