जैविक खेती : कमाई और सेहत दोनों के लिए फायदेमंद

जैविक खेती : कमाई और सेहत दोनों के लिए फायदेमंद

जैविक खेती की भारी मांग
सरकार भी दे रही है जैविक खेती को बढ़ावा
स्वस्थ खेत तो स्वस्थ अनाज
गांव के संसाधन ही करेंगे खाद का काम 



ग्रामीण उपभोक्ता पत्रिका लगातार खेती – किसानी से संबंधित ऐसी जानकारियां अपने पाठकों तक पहुंचाती रहती है जो एक उत्पादक के रूप में और फिर एक उपभोक्ता के रूप में उनके लिए फायदेमंद हो। इस सिलसिले में पत्रिका के इस अंक में हम किसानों को जागरूक करने के लिए जैविक खेती की चर्चा करेंगे।  

जैविक खेती किसे कहते हैं ?

खेती का वो रूप जो प्रकृति के साथ तालमेल बना कर चलता है और उत्पादन के काम में किसी भी तरह प्रकृति के विरुद्ध तौर-तरीके नहीं अपनाता उसे ही साधारण शब्दों में जैविक खेती के रूप में समझा जा सकता है। जैविक खेती आज आधुनिक खेती का पर्याय बन चुकी है। कृषि उत्पादन बढ़ाने के लिए दुनिया में खेती में लगातार रासायनिक खादों का चलन बढ़ता जा रहा है। इसके कारण फसल पैदावार में रासायनिक तत्वों की मात्रा लगातार बढ़ती जा रही है और उस अनाज से भोजन इंसानी सेहत के लिए खतरनाक बनता जा रहा है। यही नहीं रासायनिक खादों के इस्तेमाल से भूमि भी खराब होती है और लंबे समय तक उनका इस्तेमाल जमीन को बंजर बना देता है। यहां हम ये भी साफ करना चाहते हैं कि जैविक खेती का कतई ये मतलब नहीं है कि हम केवल पारंपरिक तरीके ही अपनाएं। बल्कि हम पारंपरिक तरीकों को आधुनिक तकनीक के साथ प्रयोग में लाएं तो जैविक खेती सही और अच्छे नतीज़े देती है। जैविक खेती में किसान अपने खेतों को प्रकृति पर छोड़ने के बजाए खुद ही आधुनिक तकनीक को प्रयोग करके प्रकृति और खेती के बीच स्वस्थ संतुलन बनाने का प्रयास करता है।  इसीलिए अब धीमे – धीमे जैविक खेती के रूप में परंपरिक खेती का दौर फिर से शुरू हो रहा है। सरकार भी जैविक खेती अपनाने के लिए लोगों को प्रेरित कर रही है। 

सबसे पहले हम ये समझने की कोशिश करते हैं कि जैविक खेती में कृषि भूमि की संरचना और उसकी उर्वरता को बनाए रखने के लिए किस प्रक्रिया की जरूरत होती है-

खेत की मिट्टी की सेहत और उसे उपजाऊ बनाए रखने तथा उसे बढ़ाने के लिए 

  • फसल के कचरे और पशु खाद का पुनर्नवीनीकरण करना

जैविक खेती में हमें काफी कुछ उन्हीं संसाधनों का इस्तेमाल करना होता है जो हमें आसानी से आसपास ही मिल जाते हैं। फसल की कटाई के बाद बचा अवशेष आमतौर पर किसी काम का नहीं समझा जाता। ऐसा है नहीं। जैविक खेती में हम फसल के इस कचरे का इस्तेमाल खेत को उपजाऊ बनाने के काम में करते हैं। इसी तरह से पशुओं से मिले गोबर का भी जैविक खेती में उर्वरता के लिए किया जाता है।    

 

  • खेतों की सही समय पर जुताई करना

 

जैविक खेती में सबसे महत्वपूर्ण है समय से खेतों की जुताई ताकि मिट्टी को धूप और ऑक्सीजन की सही मात्रा मिल सके और वो अपनी उर्वरता को बरकरार रख सके। 

 

  • फसल का चक्रीकरण

 

जैविक खेती में सबसे जरूरी है फसलों का एक ऐसा चक्र तैयार किया जाए ताकि एक फसल दूसरे के लिए मुश्किलल न पैदा करे बल्कि उसके उत्पादन में सहायक बने। 

 

  • हरी खाद और फलियां 

 

जैविक खेती में भूमि की उर्वरता के लिए हरी खाद और फलियां भी काफी मददगार होती हैं। जैसे कि नीम की कौड़ी जैविक खेती में कीटनाशक और खाद दोनों ही तरह से इस्तेमाल हो सकती  है।  

    

  • मिट्टी की सतह पर पलवार डालना

जैविक खेती में एक और महत्वपूर्ण काम है जमीन को खेती के लिए पहले ही तैयार कर लेना। इसी क्रम में खेत में प्राकृतिक रूप से उपलब्ध और तमाम ऐसे संभव तरीके आजमाए जाते हैं जिनसे बेहतर उत्पादन के साथ खेत की उर्वरता को बनाए रखा जा सके। 

  

फसल में कीड़ों और बीमारियों पर नियंत्रण के लिए

  • सही फसल का चुनाव 
  • प्रतिरोधी फसलों का उपयोग 
  • खेती के सही तकनीकों का प्रयोग 
  • फसल का चक्रीकरण 
  • कीट खाने वाले शिकारियों को बढ़ाना 
  • आनुवंशिक विविधता को बढ़ाना 
  • प्राकृतिक कीटनाशकों का प्रयोग

इसके अलावा जैविक खेती के लिए कुछ दूरी चीजों की भी जरूरत है जैसे कि खेती में बेहतर जल का इस्तेमाल और अच्छा पशुपालन।

 

जैविक खेती से लाभ ?

 मिट्टी को होने वाले लाभ 

  • जैविक खाद का उपयोग करने से भूमि की गुणवत्ता में सुधार आता है
  • भूमि की जल धारण क्षमता बढ़ती है
  • भूमि से पानी का वाष्पीकरण कम हो जाता है

किसानों को होने वाला लाभ 

  • भूमि की उपजाऊ क्षमता में वृध्दि हो जाती है
  • सिंचाई अंतराल में वृध्दि होती है 
  • रासायनिक खाद पर निर्भरता कम हो जाती है
  • फसलों की उत्पादकता में वृध्दि होती है
  • उत्पादन बढ़ता है तो मुनाफा और कमाई में वृद्धि

 पर्यावरण को लाभ 

  • भूमि के जल स्तर में वृध्दि हो जाती है
  • मिट्टी, खाद्य पदार्थ और जमीन में पानी के माध्यम से होने वाले प्रदूषणों मे भी काफी कमी आ जाती है
  • कचरे का प्रयोग खाद बनाने में  करने  से बीमारियों में कमी आती है 
  • फसल उत्पादन की लागत में काफी कमी हो जाती है और आय में वृध्दि होती है

जैविक खेती ही क्यों ?

पाठकों अब हम आपको बताएंगे कि जैविक खेती ही क्यों आपके लिए फायदेमंद साबित होगी। आज हमारे देश में लगभग 65 प्रतिशत आबादी खेती पर निर्भर है। जिस हिसाब से खेती की जमीन कम होती जा रही है उस हिसाब से आने वाले समय में अनाज की उपलब्धता और खेती की भूमि एक बड़ी चुनौती के रूप में हमारे सामने होंगे। बढ़ती आबादी के हिसाब से अनाज की पैदावार को बढ़ाना भी एक चुनौती से कम नहीं। इसी वजह से रासायनिक खादों का चलन तेजी से बढ़ा और हम पारंपरिक खेती से दूर होते गए। लेकिन रासायनिक उर्वरकों के इस्तेमाल से जहां उत्पादन बढ़ा वहीं खेती की भूमि पर इसका बहुत नकारात्मक असर पड़ा। खेत के खेत बंजर हो गए और किसान बेहाल। उपज भी सेहत के लिए नुकसानदायक हो गई। 

अब वक्त आ गया है कि जैविक खेती के तौरतरीकों को फिर से आजमाया जाए नए तौरतरीकों यानी तकनीक के साथ मिलाकर। इससे कई तरह के फायदे होंगे-

  • खेत की उर्वरता बनी रहेगी
  • जैविक खेती के लिए संसाधनो तक आपकी आपकी आसान पहुंच होगी
  • जैविक खेती में भूजल भी जहरीला या प्रदूषित होने से बचेगा क्योंकि रसायनों का इस्तेमाल भूमि पर नहीं होगा।
  • जैविक खेती में चक्रीय़ फसल पद्धति के कारण एक फसल दूसरे के लिए लाभदायक होती है
  • गांव में मौजूद फसलों के अवशेष और पशुओं के गोबर आदि का बेहतर इस्तेमाल हो सकेगा
  • जैविक खेती से उपजा अनाज सेहतमंद होगा
  • गांव और खेत का पर्यावरण सुरक्षित रहेगा
  • जैविक खेती से उपजा अनाज आज खूब मांग में है
  • जैविक खेती से उपजे अनाज की कीमत भी अच्छी मिल रही है

…………………………..

10 खास बातें  BOX

  • जैविक खेती समय की मांग है
  • जैविक खेती वाली उपज की बढ़िया कीमत
  • देश में 65 प्रतिशत लोगों की खेती पर निर्भरता
  • जैविक खेती से भूमि के साथ अनाज भी सुरक्षित
  • जैविक खेती से भूजल के खराब होने का खतरा नहीं
  • गांव में मौजूद संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल
  • गोबर और फसल के अवशेषों से बनेगी खाद
  • जैविक खेती से गांव का पर्यावरण सुधरेगा
  • जैविक खेती को सरकार से प्रोत्साहन
  • जैविक खेती में एक फसल दूसरे की मददगार