त्योहारों आ गए हैं, स्वस्थ और सुरक्षित रहना है तो सावधान रहें

त्योहारों आ गए हैं, स्वस्थ और सुरक्षित रहना है तो सावधान रहें

त्यौहारों और शादी ब्य़ाह का सीजन आ चुका है। ग्रामीण उपभोक्ता के इस अंक को इसीलिए मिलावटी खानपान पर केंद्रित किया गया है। इसे अलावा कुछ विशेष चीजों को लेकर एहतियात बरतने की जरूरत है।

त्योहार मनाते समय मिठाइयों का खास ध्यान रखें। दीपावली पर पटाखों का इस्तेमाल न करें। इससे वातावरण को कम हानि और वायु प्रदूषण कम होगा। धूप और दीपों के उपयोग में भी सावधानी बरतें, और इन्हें सुरक्षित स्थान पर रखें। खानपान में सतर्क रहें। बच्चों को खासकर पटाखों के बारे में जानकारी दें।

  • वायु प्रदूषण से बचें

इस मौसम में पटाखों एवं वाहनों से अलावा फसल अपशेष जलने का प्रदूषण काफी होता है। ऐसे में बहुत से लोगों को सांस की दिक्क्त हो जाती है। वायु प्रदूषण सांस और फेफड़ों की समस्या के अलावा, शरीर के हर अंग को नुकसान पहुंचाता है। ध्यान देने की बात यह है कि इसी दौरान कोरोना वायरस के सबवैरिएंट की दस्तक देने की खबरें भी मिल रही हैं। इसलिए हवा से होने वाली दिक्कतों को लेकर विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है। 

  • पटाखे न जलाएं

महानगरों में रहने वाले लोग इस दौरान आतिशबाजी से बचें। यदि आप ऐसा करने से परहेज करेंगे तो बच्चे भी उससे होने वाले नुकसान और प्रदूषण तथा पर्यावरण की महत्ता समझ को पाएंगे। अगर आप छोटे शहरों के निवासी हैं तो नियमों का पालन करते हुए सीमित संख्या में पटाखे जलाएं। जिस स्थान पर बच्चे पटाखे जला रहे हैं, वहां 2 बल्टी पानी जरूर रखें। इससे किसी भी प्रकार की अनहोनी होने पर तुरंत पानी डाला जा सकेगा।

  • फर्स्ट एड बाक्स तैयार रखें

कभी-कभार मिटटी के दिए जलाने पर भी अनहोनी हो जाती है। इसलिए फर्स्ट ऐड बॉक्स तैयार रखें। यदि कोई ज्यादा जल गया है, तो साफ़-सुथरे काटन शीट में लपेटकर उसे तुरंत अस्पताल ले जाएं।

  • आग से सैनिटाइज़र को दूर रखें

कोरोना महामारी के बाद से सेनिटाइजर का प्रयोग बहुत बढ़ गया है। त्योहार में भी सैनिटाइजर से हाथ को सैनिटाइज़ जरूर करें। लेकिन यह बात ध्यान में रखें कि केमिकल की मौजूदगी के कारण सैनिटाइजर बहुत अधिक ज्वलनशील होता है। जहां कहीं भी दीया जल रहा हो या पटाखे जलाये जा रहे हों, उस स्थान से सैनिटाइजर को बहुत दूर रखें।

  • धुएं और शराब से परहेज करें

कई लोगों को धुएं से एलर्जी होती है। उन्हें सांस लेने में तकलीफ होती है। ऐसे लोग धुएं के पास जाने से परहेज करें। किसी भी प्रकार के सांस के रोगों के मरीज घर के अंदर रहें। लंबे वीकेंड के साथ जब त्योहार आता है, तो लोग ज्यादा ही पार्टी मूड में आ जाते हैं। मगर पार्टी का मतलब नशे में धुत हो जाना नहीं है। अगर आप अल्कोहल के प्रति ज्यादा सेंसिटिव हैं, तो बेहतर होगा कि आप ऐसी पार्टियों से परहेज करें।

  • पौष्टिक खाएं स्वस्थ रहें

अक्सर हम त्योहार के नाम पर खूब तली-भुनी चीज़ें खा लेते हैं। जम कर मिठाइयां खा लेते हैं। फिर त्योहार खत्म होने पर हाई बीपी, हाई शुगर, हाई कोलेस्ट्रॉल और मोटापा से परेशान होने लगते हैं। स्वास्थ्य ही सबसे बड़ा धन है।

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सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, ग्रीन पटाखे बनाने की दी अनुमति

इस बार दिल्ली-एनसीआर की दिवाली धूम धड़ाके वाली हो सकती है। सुप्रीम कोर्ट ने इसके संकेत दे दिए हैं। दिल्ली-एनसीआर में पटाखों पर 26 सितंबर को सुनवाई हुई। इस दौरान कोर्ट ने दिल्ली-एनसीआर में ग्रीन पटाखे बनाने की अनुमति दे दी है। अभी तक इस पर पूरी तरह पाबंदी थी। कोर्ट ने ग्रीन पटाखों के निर्माण की सशर्त अनुमति दे दी है। हालांकि कोर्ट ने यह स्पष्ट नहीं किया है कि पटाखों की बिक्री हो सकेगी या नहीं। कोर्ट ने पटाखे बनाने की अनुमति देने के साथ ही केंद्र सरकार के लिए निर्देश जारी किया। कोर्ट ने कहा कि सभी हित धारकों से मिलकर प्रतिबंध के आदेश को लागू करने की नीति बनाए। कोर्ट ने कहा कि दिल्ली-एनसीआर में पटाखों पर पूर्ण प्रतिबंध के कोर्ट के आदेश के बावजूद इसे लागू नहीं कराया जा सका है।

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क्या होते हैं ग्रीन पटाखे, कितनी तरह के और कैसे कम करते हैं प्रदूषण

उत्तर भारत में गहराते वायु प्रदूषण के बीच इस बार दीवाली पर ग्रीन पटाखों का ही इस्तेमाल किया जा सकता है। दो साल पहले तक जब दीवाली पर पटाखे जलाए जाते थे। आतिशाबाजियां होती थीं तो प्रदूषण का स्तर एकाएक बहुत बढ़ जाता था। इसमें सांस लेना औऱ भी ज्यादा मुश्किल हो जाता था। इस बीच ऐसी पटाखों और आतिशबाजियों की जरूरत महसूस की जाने लगी, जो कम प्रदूषण करते हों और कम हानिकारक हों। ऐसे में राष्ट्रीय पर्यावरण अभियांत्रिकी अनुसंधान संस्थान (नीरी) ने ग्रीन पटाखों पर काम शुरू किया। जल्द ही उसके वैज्ञानिकों ने ऐसे ग्रीन पटाखों को बनाने में सफलता पा ली। दुनिया भर में इन्हें प्रदूषण से निपटने के एक बेहतर तरीके की तरह देखा जा रहा है। 

औद्योगिक अनुसंघान परिषद (सीएसआईआर) से जुड़ी संस्था नीरी द्वारा तैयार पटाखे पारंपरिक पटाखों सरीखे ही होते हैं। इनके जलने से कम प्रदूषण होता है। इससे दीवाली का मज़ा कम नहीं होता, क्योंकि ये ग्रीन पटाखे दिखने, जलाने और आवाज़ में सामान्य पटाखों की तरह ही होते हैं। आमतौर पर ग्रीन पटाखों से 50 फीसदी तक वायु प्रदूषण कम हो जाता है। ये हवा में बहुत विषैली गैस रिलीज नहीं करते।

नीरी के मुताबिक फिलहाल तीन तरह के ग्रीन पटाखे बनाए जा रहे हैं।

  • सेफ वाटर रिलीजर पहली तरह के पटाखें जलने के साथ पानी पैदा करते हैं जिससे सल्फ़र और नाइट्रोजन जैसी हानिकारक गैसें इन्हीं में घुल जाती हैं। इन्हें सेफ़ वाटर रिलीज़र भी कहा जाता है.
  • स्टार क्रैकर – दूसरी तरह के पटाखे स्टार क्रैकर के नाम से जाने जाते हैं। ये सामान्य से कम सल्फ़र और नाइट्रोजन पैदा करते हैं। इनमें एल्युमिनियम का इस्तेमाल भी कम से कम किया जाता है।
  • अरोमा क्रैकर्स – तीसरी तरह पटाखे अरोमा क्रैकर्स हैं जो कम प्रदूषण के साथ-साथ खुशबू भी पैदा करते हैं।

कहां मिलेंगे ग्रीन पटाखे ?

अब ग्रीन पटाखे उन सभी आतिशबाजी की दुकानों पर उपलब्ध होंगे, जिन्हें इसका लाइसेंस मिला हुआ है। वैसे बाजार में अब पुरानी तरह के प्रदूषण फैलाने वाली पटाखे बेचने पर मनाही है। ज्यादातर क्रैकर्स निर्माता कंपनियां अब ऐसे ही पटाखों का उत्पादन कर रही हैं। आमतौर पर बाजार में जो पटाखे और आतिशबाजी बिकती हैं,  उनका निर्माण शिवकाशी में बड़े पैमाने पर होता है। रिपोर्ट्स के अनुसार, अब शिवकाशी में ज्यादातर ग्रीन पटाखे ही तैयार किए जा रहे हैं, जो इको – फ्रेंडली होंगे। इनसे नुकसानदायक रासायनिक उत्सर्जन भी कम होगा, आवाज भी कम होगी और ये पूरी तरह सुप्रीम कोर्ट के दिशानिर्देश के तहत ही बनाए जा रहे हैं। शिवकाशी में 1000 से ज्यादा मेनुफैक्चरिंग इकाइयां हैं, जो साल भर बड़े पैमाने पर ग्रीन पटाखों का निर्माण करती हैं। इनका कारोबार हजारों करोड़ का होता है।