देश में नई श्रमिक संहिता, 29 कानूनों की जगह 4 लेबर कोड

देश में नई श्रमिक संहिता, 29 कानूनों की जगह 4 लेबर कोड

8 से 12 घंटे रोजाना काम करना जरूरी

एक साल में ग्रेच्युटी के हकदार, समयपरवेतन

महिलाओंकोकामकेसमानअवसर

ओवरटाइमऔरन्यूनतममजदूरीकेनएनियम

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सरकार ने देश के सभी मजदूरों और कर्मचारियों के लिए एक बड़ा फैसला करते हुए  चार नए लेबर कोड लागू किए हैं। पहले जो 29 अलगअलग श्रम कानून थे, उनमें से जरूरी बातें निकालकर इन्हें अब 4 आसान और साफ नियमों में बदल दिया गया है।

इन नए नियमों का मकसद हर कामगार को समय पर और ओवरटाइम वेतन, न्यूनतम मजदूरी, महिलाओं को बराबर मौका और सैलरी, सोशल सिक्योरिटी, फ्री हेल्थ चेकअप देना है। नए कानून से कर्मचारी को 5 की जगह सिर्फ 1 साल में ग्रेच्युटी का लाभ मिलेगा।

सरकार का कहना है कि पुराने श्रम कानून 1930–1950 के बीच बने थे, जब कामकाज, इंडस्ट्री और टेक्नोलॉजी आज से बिल्कुल अलग थे। नए कोड आधुनिक जरूरतों और अंतरराष्ट्रीय मानकों को ध्यान में रखकर बनाए गए हैं। इसलिए पुराने 29 श्रम कानूनों को सरल बनाकर चार लेबर कोड में बदल दिया है।

नए लेबर कोड से क्या हैं फायदे ?

फिक्स्डटर्म स्टाफ को परमानेंट लेवल के फायदे:

फिक्स्डटर्म वाले कर्मचारी अब परमानेंट वर्कर्स जैसे फायदे पाएंगे, जैसे सोशल सिक्योरिटी, मेडिकल कवर और पेड लीव। ग्रेच्युटी पाने के लिए 5 साल की जगह एक साल का समय ही लगेगा। इससे कॉन्ट्रैक्ट मजदूरों पर ज्यादा निर्भरता कम होगी और डायरेक्ट हायरिंग को बढ़ावा मिलेगा।

सभी मजदूरों के लिए मिनिमम वेज और समय पर पेमेंट:

हर सेक्टर के मजदूरों को नेशनल फ्लोर रेट से जुड़ा न्यूनतम वेतन मिलेगा, साथ ही समय पर पेमेंट और अनऑथराइज्ड कटौतियां बंद होंगी।

महिलाओं को सभी शिफ्ट्स और जॉब रोल्स में अनुमति:

महिलाएं नाइट शिफ्ट्स में और सभी कैटेगरी में उनकी मंजूरी और सेफ्टी मेजर्स के साथ काम कर सकेंगी। जैसे माइनिंग, हैवी मशीनरी और खतरनाक जगहों पर। बराबर पेमेंट जरूरी है और ग्रिवांस पैनल्स में उनका प्रतिनिधित्व जरूरी है।

बेहतर वर्किंगआवर रूल्स और ओवरटाइम प्रोटेक्शन:

ज्यादातर क्षेत्रों नें रोजाना 8 से 12 घंटे कां करना होगा और हफ्ते में कम से 48 घंटे काम करना होगा। ओवरटाइम के लिए दोगुना वेतन और जरूरी जगहों पर लिखित कंसेंट जरूरी होगा। एक्सपोर्ट्स जैसे सेक्टर्स में 180 वर्किंग डेज के बाद लीव्स एक्यूमुलेट होंगी।

नियुक्ति पत्र देना जरूरी होगा :

अब सभी नियोक्ताओं (एम्प्लॉयर्स) को हर मजदूर को अपॉइंटमेंट लेटर देना जरूरी होगा।इससे मजदूरों की नौकरी का रिकॉर्ड साफ रहेगा, वेतन में पारदर्शिता रहेगी और उन्हें मिलने वाले लाभों तक पहुंच आसान होगी। इस कदम से आटीटी, टैक्सटाइल जैसी इंडस्ट्री में काम करने वाले लोगों की नौकरियां अधिक फॉर्मल होंगी और सिस्टम अधिक व्यवस्थित होगा।

गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स को आधिकारिक मान्यता :

पहली बार गिग और प्लेटफॉर्म मजदूरों को कानूनी तौर पर परिभाषित किया गया। एग्रीगेटर्स को अपनी कमाई का 1 से 2  (पेमेंट्स का 5 प्रतिशत तक कैप) वेलफेयर के लिए देना होगा और आधार से लिंक्ड पोर्टेबल फायदे हर राज्य में मिलेंगे।

जोखिम वाली इंडस्ट्रीज में हेल्थ चेकअप्स और सेफ्टी नियम जरूरी :

खतरनाक फैक्ट्रियों, प्लांटेशन, कॉन्ट्रैक्ट लेबर और खदानों में काम करने वाले मजदूरों (जो तय संख्या से ज्यादा हैं) के लिए हर साल फ्री हेल्थ चेकअप कराना जरूरी होगा। इसके साथ ही सरकार द्वारा तय किए गए सेफ्टी और हेल्थ स्टैंडर्ड लागू करने होंगे बड़े संस्थानों में सेफ्टी कमेटी बनाना भी अनिवार्य होगा, ताकि मजदूरों की सुरक्षा पर लगातार नजर रखी जा सके।

उद्योगों में सोशल सिक्योरिटी का नेटवर्क और बड़ा:

सोशल सिक्योरिटी कोड की कवरेज पूरे देश में विस्तारित की जाएगी। इसमें MSME कर्मचारी, खतरनाक जगहों पर काम करने वाले मजदूर, प्लेटफॉर्म वर्कर्स और वो सेक्टर शामिल हैं जो पहले ESI की स्कीम से बाहर थे।

डिजिटल और मीडिया वर्कर्स को आधिकारिक कवर:

अब पत्रकार, फ्रीलांसर, डबिंग आर्टिस्ट और मीडिया से जुड़े लोग भी लेबर प्रोटेक्शन के दायरे में आएंगे।इसका मतलब है कि उन्हें अपॉइंटमेंट लेटर मिलेगा, उनकी सैलरी समय पर और सुरक्षित रहेगी, और उनके काम के घंटे तय और नियमबद्ध होंगे।

कॉन्ट्रैक्ट, माइग्रेंट और अनऑर्गनाइज्ड वर्कर्स के लिए मजबूत प्रोटेक्शन:

कॉन्ट्रैक्ट और दूसरे शहरों से आए मजदूरों को अब स्थायी कर्मचारियों जितना ही वेतन, सरकार की कल्याणकारी योजनाएं, और ऐसी सुविधाएं मिलेंगी जो एक जगह से दूसरी जगह जाने पर भी जारी रहेंगी। साथ ही जिस कंपनी में वे काम करते हैं, उसे उनके लिए सोशल सिक्योरिटी देना जरूरी होगा और पीने का पानी, आराम करने की जगह और साफसफाई जैसी बुनियादी सुविधाएं भी उपलब्ध करानी होंगी।

क्या रही उद्योग और श्रम संघों की प्रतिक्रियाएं ?

नए लेबर कोड को लागू होने के बाद, क्या स्थितियां बनेंगी यह तो बाद का विषय है लेकिन उनके बारे में श्रम संगठनों से लेकर राजनीतिक दलों तक में विभिन्न तरह की प्रतिक्रियाएं सामने  आई हैं :

अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन के महानिदेशक गिल्बर्ट एफ. हुंगबो ने कहा है कि नई श्रम संहिता लागू होने से सरकारी रोजगार प्रदाताओं और श्रमिकों के बीच सामाजिक सुरक्षा संवाद मजबूत होगा। एक पोस्ट में उन्होंने कहा, भारत की नई श्रम संहिताओं में सामाजिक सुरक्षा और न्यूनतम मजदूरी शामिल हैं, दिलचस्पी से इस कदम को देख रहा हूं।

नैसेंट इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी एम्प्लॉइज सीनेट (एनआईटीईएस) के प्रेसिडेंट हरप्रीत सिंह सलूजा ने कहा कि श्रम संहिताओं के जरिये सबसे असरदार बदलावों में से एक है लाभप्रद सुविधाओं को डिजिटली ट्रैक करना। खासकर, आईटी जैसे क्षेत्र के लिए यह बेहद अहम है, जहां कर्मचारी तेजी से नौकरियां बदलते हैं।

ट्रेड यूनियनों ने लेबर कोड की निंदा की

10 लेबर यूनियनों के एक संयुक्त फोरम ने लेबर कोड की निंदा करते हुए कहा है कि यह कदम मजदूर विरोधी है और मालिकों का समर्थन करता है। वहीं भारतीय मजदूर संघ ने सुधारों का स्वागत किया और इसे लंबे समय से इंतजार किया जा रहा कदम बताया।

भारतीय उद्योग परिसंघ ने बताया मील का पत्थर
केंद्र सरकार की ओर से चार श्रम संहिताओं को लागू करने के फैसले का उद्योग जगत ने स्वागत किया है। उद्योगपतियों ने इस कदम को भारत के श्रम कानूनों को सरल बनाने और आधुनिक बनाने की दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर बताया है। भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) के महानिदेशक चंद्रजीत बनर्जी ने इसे ऐतिहासिक उपलब्धि बताते हुए कहा कि यह सुधार बेहतर वेतन, मजबूत सामाजिक सुरक्षा और कार्यस्थल पर बेहतर सुरक्षा सुनिश्चित करेगा। पीडब्ल्यूसी इंडिया के लोकेश गुलाटी ने कहा कि ये संहिताएं नियमों के अनुपालन को सरल बनाएंगी और निवेश आकर्षित करने में मदद करेंगी।

निर्यातकों को मिलेगा प्रोत्साहन :
वाणिज्य मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि श्रम संहिताओं के लागू होने से देश का निर्यात तंत्र मजबूत होगा। उन्होंने कहा कि ये सुधार अस्थिर वैश्विक बाजारों में प्रतिस्पर्धा करने और अंतरराष्ट्रीय अनुपालन मानकों को पूरा करने के लिए बहुत जरूरी थे। अधिकारी ने कहा कि श्रमिकों के लिए ये प्रावधान निष्पक्ष मजदूरी, सामाजिक सुरक्षा, समानता, कौशल  उन्नयन के अवसर और श्रम की गरिमा सुनिश्चित करते हैं।

गिग श्रमिकों की स्थिति होगी मजबूत : इटरनल
जोमैटो और ब्लिंकिट की मूल कंपनी इटरनल लिमिटेड ने चारों श्रम संहिताओं के लागू होने का स्वागत किया। कंपनी ने कहा कि इससे गिग श्रमिकों की सामाजिक सुरक्षा तक पहुंच मजबूत होगी। गिग श्रमिकों में उसके जोमैटो और ब्लिंकिट कारोबार से जुड़े डिलीवरी साझेदारों को भी लाभ मिलेगा। इटरनल ने बताया कि लंबी अवधि में इन नए नियमों का उसके कारोबार की सेहत और स्थिरता पर कोई नकारात्मक वित्तीय असर नहीं पड़ेगा। नई संहिताओं में पहली बार गिग कार्य, मंच कार्य और एग्रीगेटर की परिभाषाएं दी गई हैं।
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