देश का पहला हरित गांव भी है खोनोमा
आज तक गांव में कोई चोरी नहीं हुई
बिना दुकानदार की चलती हैं दुकानें
सामान लो, पैसा दुकान पर रख दो
घऱों में नहीं लगाए जाते ताले
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ग्रामीण उपभोक्ता शोध डेस्क
आपने देश में तमाम ऐसी पंचाय़तों के बारे में सुना होगा जिन्होंने कोई अभिनव प्रयोग किया होगा। कहीं साक्षऱता को प्राथमिकता दी गई तो कहीं, जैविकखेतीको।कोईगांवकोस्वच्छतापरखासकामकररहाहैतोकोईहरितऊर्जाकेक्षेत्रमें।कईनेस्वयंसहायतासमूहोंसेअपनीविशेषपहचानबनाई।
आज ग्रामीण उपभोक्ता पत्रिका के पंचायत कॉलम में एक ऐसे गांव की कहानी बताने जा रहे हैं जो भारत के उत्तर–पूर्व के नागालैंड में है। इस गांव का नाम है खोनोमा। यह देश का सबसे ईमानदार गांव है और यही इसकी सबसे बड़ी भी खैासियत है। खोनोमा देश का पहला हरित गांव भी है। यहां के लोग अपनी ईमानदारी के साथ प्रकृति के प्रति भी बेहद ईमानदार हैं। वे साफ–सफाई के अलावा स्वच्छ वातावरण को लेकर काफी संजीदा हैं।
नागालैंडकेखोनोमागांवभारतकीएकऐसीजगहहैजहांदुकानोंपरआपकोदुकानदारनगींमिलेंगे।गांवकेघरोंमेंतालेलटकेनहींमिलेंगे।हरकोईअपनेसामानकोलेकरनिश्चिंतहै।इसगांवकोदेशकासबसेईमानदारगांवकहाजाताहै।
आइए समझते हैं इस खोनोमा गांव की और क्या–क्या खूबियां हैं।
आज के दौर में जहां धोखाधड़ी, फरेब और चोरी आम बात हो गई है, वहीं नागालैंड का एक छोटा सा गांव अपनी ईमानदारी से सबका दिल जीत रहा है। इस गांव में ऐसी दुकानें हैं जहां न कोई दुकानदार होता है और न ही दुकानों पर ताला लगाया जाता है। लोग अपनी जरूरत का सामान खुद लेते हैं और जितने पैसे का सामान लेते हैं, उतनेपैसेवहींरखदेतेहैं।यहांकोईचोरीनहींकरताऔरनहीकिसीकोडरहोताहैकिउसकानुकसानहोगा।इसगांवकेलोगसच्चाईऔरविश्वासकेप्रतीकबनचुकेहैं।
बिना दुकानदार के दुकानें और बिना तालों के बंद घर
भारत में कई स्थान अपनी संस्कृति और परंपराओं के लिए प्रसिद्ध हैं, लेकिन नागालैंड का खोनोमा गांव अपनी ईमानदारी और भरोसे के लिए खास पहचान रखता है। इस गांव में वर्षों से ऐसी दुकानें हैं जहां कोई दुकानदार नहीं होता। ग्राहक खुद सामान चुनते हैं और उतनी ही राशि ईमानदारी से रखकर चले जाते हैं। आश्चर्य की बात यह है कि इतने सालों में यहां किसी ने चोरी करने की कोशिश तक नहीं की। यही वजह है कि खोनोमा गांव ‘ईमानदारी का प्रतीक‘ कहलाता है।
कहां है खोनोमा गांव ?
खोनोमा गांव नागालैंड में स्थित है और यह अपनी ईमानदारी, खूबसूरती और स्वच्छ वातावरण के लिए मशहूर है। यहां के लोग पीढ़ियों से बिना डर और शक के जीवन जीते हैं। दुकानों में सामान के साथ पैसे रखे होते हैं, फिर भी कोई चोरी नहीं करता। गांव वाले मानते हैं कि दूसरों का हक छीनना या धोखा देना गलत है। उनकी यही सोच और संस्कार इस गांव को पूरे देश में ईमानदारी का प्रतीक बनाते हैं।
खोनोमा देश का पहला ग्रीन गांव भी है
खोनोमा गांव भारत का पहला ग्रीन विलेज कहलाता है। यहां के लोग पर्यावरण संरक्षण के लिए विशेष प्रयास करते हैं। साफ–सफाई, हरियाली और प्रकृति से प्रेम इस गांव की पहचान है। इसकी प्राकृतिक सुंदरता और लोगों की ईमानदारी देखने हर साल देश–विदेश से पर्यटक यहां आते हैं।
नहीं हुई यहां कभी चोरी
इस गांव की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यहां आज तक चोरी या अपराध की कोई घटना दर्ज नहीं हुई है। दुकानों पर सालों से ताले नहीं लगाए जाते, फिर भी सामान सुरक्षित रहता है। लोग जितना सामान लेते हैं, उतनाहीपैसाईमानदारीसेछोड़जातेहैं।यहअनोखीपरंपरापीढ़ियोंसेचलीआरहीहैऔरउम्मीदहैकिआगेभीकायमरहेगी।
कैसे पहुंचेंगे खोनोमा गांव ?
खोनोमा गांव नागालैंड की राजधानी कोहिमा से लगभग 20 किलोमीटर दूर है। यहां पहुंचने के लिए सबसे पहले आप दीमापुर हवाई अड्डे या रेलवे स्टेशन तक पहुंच सकते हैं, जो नागालैंड का प्रमुख प्रवेश द्वार है। दीमापुर से कोहिमा तक टैक्सी या बस से करीब 3 घंटे का सफर है। कोहिमा से आप स्थानीय टैक्सी या शेयर जीप लेकर आसानी से खोनोमा गांव पहुंच सकते हैं।
पर्यटकों को खूब भाता है खोनोमा
खोनोमा की यही खूबी देश–विदश के पर्यटकों को अपनी तरफ खींचती है।नागालैंड की यात्रा पर जाने वाले लोग अक्सर खोनोमा जरूर जाते हैं।वे गांव की स्वच्छता और पर्यावरण के प्रति लोगों की जिम्मेदारी से विशेष तौर पर बहुत प्रभावित होते हैं।राजधानी कोहिमा से इसकी निकटता भी बड़ा कारण है कि लोगों के लिए खोनोमा की यात्रा काफी सुविधाजनक है।
देश के दूसरे गांवों के लिए भी खोनोमा एक मिसाल है।
