25 दिसंबर से नए नियम लागू
नियमों का मकसद पात्र लोगों तक सुविधा को पहुंचाना
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भारत सरकार द्वारा देश के गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों के लिए चलाई जा रही कल्याणकारी योजनाओं में समय–समय पर बदलाव किए जाते हैं। इसी कड़ी में, 25 दिसंबर 2025 से राशन कार्ड और गैस सिलेंडर के इस्तेमाल को लेकर कुछ बड़े और महत्वपूर्ण नियम लागू कर दिए गए हैं। इन बदलावों का मुख्य उद्देश्य सरकारी सुविधाओं में पारदर्शिता लाना और यह सुनिश्चित करना है कि लाभ केवल पात्र व्यक्तियों तक ही पहुंचे।
यदि आप भी राशन कार्ड धारक हैं या प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के तहत गैस सिलेंडर का लाभ लेते हैं, तो ये खबरें आपके लिए बहुत जरूरी हैं। सरकार ने स्पष्ट किया है कि नियमों का पालन न करने पर न केवल राशन मिलना बंद हो सकता है, बल्कि गैस सब्सिडी पर भी रोक लग सकती है। इन नियमों के लागू होने से फर्जी राशन कार्डों पर लगाम लगेगी और सिस्टम पूरी तरह डिजिटल हो जाएगा।
पांच नए नियम
5 नए नियमों के तहत ई–केवाईसी (e-KYC), बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन और वन नेशन वन राशन कार्ड जैसी सुविधाओं को और भी सख्त और बेहतर बनाया जा रहा है। चलिए विस्तार से जानते हैं कि 25 दिसंबर से आपकी रसोई और राशन पर क्या असर पड़ने वाला है और आपको कौन से जरूरी काम समय रहते पूरे कर लेने चाहिए।
25 दिसंबर से राशन कार्ड और गैस सिलेंडर पर लागू होंगे 5 नए नियम
सरकार द्वारा सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) और रसोई गैस वितरण को लेकर जो नई गाइडलाइन्स जारी की गई हैं, उनका सीधा असर देश के करोड़ों लाभार्थियों पर पड़ेगा। इन नियमों को लागू करने की तारीख 25 दिसंबर 2025 तय की गई है, ताकि नए साल से पहले सभी व्यवस्थाएं दुरुस्त हो सकें।
Ration Card and Gas Cylinder Update 2025 Overview Table
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योजना/अपडेट का नाम |
राशन कार्ड और गैस सिलेंडर नए नियम 2025 |
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लागू होने की तिथि |
25 दिसंबर 2025 |
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मुख्य बदलाव |
ई–केवाईसी, बायोमेट्रिक और सब्सिडी नियम |
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लाभार्थी |
राशन कार्ड धारक और उज्ज्वला गैस उपभोक्ता |
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जरूरी दस्तावेज |
आधार कार्ड, राशन कार्ड, मोबाइल नंबर |
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विभाग |
खाद्य एवं रसद विभाग और पेट्रोलियम मंत्रालय |
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उद्देश्य |
फर्जीवाड़ा रोकना और पारदर्शिता लाना |
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आधिकारिक वेबसाइट |
1. राशन कार्ड धारकों के लिए अनिवार्य ई–केवाईसी (e-KYC)
सबसे पहला और सबसे महत्वपूर्ण नियम ई–केवाईसी से जुड़ा है। सरकार ने आदेश दिया है कि राशन कार्ड में दर्ज सभी सदस्यों का आधार वेरिफिकेशन अनिवार्य है। यदि किसी सदस्य की ई–केवाईसी 25 दिसंबर तक पूरी नहीं होती है, तो उसका नाम राशन कार्ड से काट दिया जाएगा।
यह प्रक्रिया आप अपने नजदीकी कोटेदार (राशन डीलर) के पास जाकर पीओएस (PoS) मशीन के माध्यम से अंगूठा लगाकर पूरी कर सकते हैं। इसके पीछे सरकार का तर्क है कि कई ऐसे लोग भी राशन ले रहे हैं जिनकी मृत्यु हो चुकी है या जो अपात्र हैं।
2. गैस सिलेंडर डिलीवरी के लिए ओटीपी (OTP) अनिवार्य
अब गैस सिलेंडर की कालाबाजारी रोकने के लिए सरकार ने डिलीवरी सिस्टम में बदलाव किया है। 25 दिसंबर से जब भी आपके घर गैस सिलेंडर आएगा, तो डिलीवरी बॉय को आपको एक ओटीपी (One Time Password) देना होगा।
यह ओटीपी आपके उस मोबाइल नंबर पर आएगा जो गैस एजेंसी में रजिस्टर्ड है। बिना ओटीपी वेरिफिकेशन के सिलेंडर की डिलीवरी सफल नहीं मानी जाएगी। इससे यह पक्का होगा कि सिलेंडर सही उपभोक्ता तक पहुंचा है।
3. अपात्र राशन कार्डों का होगा निरस्तीकरण
सरकार ने डेटा छानबीन के बाद करोड़ों फर्जी राशन कार्डों की पहचान की है। जो लोग आयकर (Income Tax) भरते हैं, जिनके पास चार पहिया वाहन है या जो सरकारी नौकरी में हैं, उनके राशन कार्ड 25 दिसंबर के बाद रद्द कर दिए जाएंगे।
खाद्य विभाग की टीमों द्वारा ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में भौतिक सत्यापन (Physical Verification) भी किया जा रहा है। यदि कोई गलत तरीके से राशन लेते पाया गया, तो उससे अब तक लिए गए राशन की वसूली बाजार रेट पर की जा सकती है।
4. प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना ई–केवाईसी और सब्सिडी
उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों के लिए भी LPG e-KYC अनिवार्य कर दी गई है। सब्सिडी का लाभ सीधे बैंक खाते में (DBT) पाने के लिए आपका आधार कार्ड बैंक खाते और गैस कनेक्शन दोनों से लिंक होना चाहिए।
जिन ग्राहकों ने अभी तक अपनी गैस एजेंसी जाकर केवाईसी नहीं करवाई है, उनकी सब्सिडी 25 दिसंबर से रोकी जा सकती है। सरकार का लक्ष्य है कि केवल आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को ही सस्ती दरों पर गैस सिलेंडर मिले।
5- वन नेशन वन राशन कार्ड (ONORC) के नए फीचर्स
25 दिसंबर से वन नेशन वन राशन कार्ड के तहत पोर्टेबिलिटी नियमों को और आसान बनाया जा रहा है। अब प्रवासी मजदूर देश के किसी भी कोने में हों, वे अपनी पसंद की राशन दुकान से बायोमेट्रिक देकर अनाज ले सकेंगे।
नई तकनीक के जरिए अब मशीनों को अपडेट किया गया है ताकि सर्वर की समस्या न आए और लाभार्थियों को घंटों लाइन में न लगना पड़े। इसके साथ ही अब कुछ राज्यों में राशन के साथ–साथ दाल, तेल और नमक के वितरण पर भी सख्ती बरती जाएगी।
महत्वपूर्ण दस्तावेजों की सूची
इन नए नियमों के लाभ और कार्ड को चालू रखने के लिए आपके पास निम्नलिखित दस्तावेज अपडेटेड होने चाहिए:
- परिवार के सभी सदस्यों का आधार कार्ड।
- एक्टिव मोबाइल नंबर (जो आधार से लिंक हो)।
- बैंक खाते की पासबुक (सब्सिडी के लिए)।
- मूल राशन कार्ड की कॉपी।
- आय प्रमाण पत्र (यदि पात्रता की जांच हो रही हो)।
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हेडिंग
सेहत और पर्यावरण के सवाल, अगरबत्ती के लिए नए मानक तय
सब हेड
खतरनाक रसायनों और सेंट के इस्तेमाल पर रोक
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सरकार ने उपभोक्ताओं की सुरक्षा, घर के अंदर की हवा की गुणवत्ता और पर्यावरण की रक्षा के लिए अगरबत्ती के लिए एक नया बीआईएस मानक जारी किया है। इस नए नियम से अगरबत्ती बनाने में इस्तेमाल होने वाले हानिकारक रसायनों पर रोक लगेगी। केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्री प्रल्हाद जोशी ने राष्ट्रीय उपभोक्ता दिवस 2025 के मौके पर ‘आईएस 19412:2025-अगरबत्ती‘ मानक जारी किया। इसका उद्देश्य लोगों को सुरक्षित और अच्छी गुणवत्ता की अगरबत्ती उपलब्ध कराना है। हाल ही में अधिसूचित नए मानक में कुछ ऐसे कीटनाशक रसायनों और नकली खुशबू वाले पदार्थों के इस्तेमाल पर रोक लगाई गई है, जो लोगों की सेहत, घरकेअंदरकीहवाऔरपर्यावरणकेलिएनुकसानदायकहोसकतेहैं।इससेअगरबत्तीजलानेसेहोनेवालेनुकसानकोकमकियाजासकेगा।
कुछ कीटनाशकों और रसायनों के इस्तेमाल पर रोक
भारत दुनिया में अगरबत्ती का सबसे बड़ा निर्माता और निर्यातक है। देश में अगरबत्ती उद्योग का आकार करीब 8,000 करोड़ रुपए का है, और लगभग 1,200 करोड़ रुपए की अगरबत्ती 150 से ज्यादा देशों में भेजी जाती है। यह उद्योग गांवों और छोटे शहरों में काम करने वाले कारीगरों, छोटे व्यापारियों और एमएसएमई इकाइयों को रोजगार देता है। खासकर महिलाओं को बड़ी संख्या में काम मिलता है, जिससे उनकी आजीविका चलती है। नए बीआईएस मानक के अनुसार, अगरबत्ती बनाने में कुछ खास रसायनों के इस्तेमाल पर पूरी तरह रोक होगी। इनमें एलेथ्रिन, परमेथ्रिन, साइपरमेथ्रिन, डेल्टामेथ्रिन और फिप्रोनिल जैसे कुछ कीटनाशक रसायन, साथ ही बेंजाइल साइनाइड, एथिलएक्रिलेटऔरडिफेनिलमाइनजैसेनकलीखुशबूवालेपदार्थशामिलहैं।इनमेंसेकईरसायनपहलेहीकईदेशोंमेंस्वास्थ्यऔरपर्यावरणकोनुकसानपहुंचानेकेकारणप्रतिबंधितयाबैनकिएजाचुकेहैं।इसलिएभारतमेंभीइनकेइस्तेमालकोरोकनेकीजरूरतमहसूसकीगई।
क्यों जरूरी था नया मानक बनाना ?
मंत्रालय के अनुसार, उपभोक्ताओं की सुरक्षा, स्वच्छ हवा और पर्यावरण की रक्षा को ध्यान में रखते हुए अगरबत्ती के लिए अलग से भारतीय मानक बनाना जरूरी था। इस नए मानक में अगरबत्ती को मशीन से बनी, हाथ से बनी और पारंपरिक मसाला अगरबत्ती के रूप में बांटा गया है। इसमें कच्चे माल, जलने की गुणवत्ता, खुशबू और रसायनों की सीमा से जुड़े नियम तय किए गए हैं, ताकि लोगों को सुरक्षित और अच्छी गुणवत्ता की अगरबत्ती मिले। जो अगरबत्तियां इस मानक पर खरी उतरेंगी, उन पर बीआईएस का स्टैंडर्ड मार्क लगाया जाएगा। इससे उपभोक्ता आसानी से सही और सुरक्षित उत्पाद चुन सकेंगे। सरकार का कहना है कि इस नए नियम से उपभोक्ताओं का भरोसा बढ़ेगा, पारंपरिक कारीगरों की आजीविका सुरक्षित होगी और भारतीय अगरबत्ती को दुनिया के बाजार में और पहचान मिलेगी।
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