बिचौलिया तंत्र को किनारे करने की कोशिश
किसान को ज्यादा मुनाफा तो होटलों को मिलेगा सस्ता सामान
कृषि मंत्रालय की डिजिटल ऐप बनाने की तैयारी
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देश में होटल एवं रेस्ट्रा उद्योग का कारोबार लगातार बढ़ रहा है। इन उद्योगों के साथ भी कई तरह के सहयोगी उद्यम जुड़े हुए हैं। इनमें सबसे प्रमुख है फल-सब्जियां एवं खाद्य उत्पादों की सप्लाई से जुड़ा तंत्र। अभी तक बिचौलिया तंत्र के जरिए इस तरह की जरूरतों को पूरा किया जाता है यानी होटल या रेस्ट्रां बड़े खरीदारों के माध्यम से अपनी खाद्य उत्पादों की जरूरतों को पूरा करते हैं। लेकिन अब सरकार की कोशिश रेस्ट्रां और होटल उद्योग से जुड़ी खाद्य आवश्यकताओं को किसानों या कृषक उत्पाद संगठनों (एफपीओ) के माध्यम से कारने की है।
देश में किसानों की आय बढ़ाने और कृषि आपूर्ति तंत्र को सरल बनाने के लिए केंद्र सरकार ने एक नई पहल की तरफ कदम बढ़ाया है। कृषि सचिव देवेश चतुर्वेदी ने होटलों और रेस्तरां उद्योग से अपील की है कि वे फलों-सब्जियों, मसालों और अन्य खाद्य उत्पादों की खरीद सीधे किसानों या एफपीओ (Farmer Producer Organizations) से करें। उनका कहना है कि इससे किसानों को उनकी उपज का सही मूल्य मिलेगा और बिचौलियों पर निर्भरता खत्म होगी।
किसान और होटल उद्योग दोनों के लिए फायदेमंद साझेदारी
सरकार का कहना है कि, देशभर में हजारों होटल और रेस्तरां चल रहे हैं और इन संस्थानों को स्थानीय किसानों से सीधा जोड़ दिया जाए तो भोजन की गुणवत्ता भी अच्छी होगी और किसानों के लिए यह आर्थिक लाभ का अवसर भी बनेगा। इससे न सिर्फ एक व्यापारिक लेन-देन की शुरुवात होगी, बल्कि किसानों के साथ मजबूत विश्वास और भागीदारी का रिश्ता भी बनेगा।
कृषि सचिव, देवेश चतुर्वेदी के अनुसार, भारत में 35,000 से अधिक कृषि उत्पादक संगठन (एफपीओ) मौजूद हैं, जिनमें से लगभग 10,000 सरकार की योजनाओं के तहत बनाए गए हैं। सरकार का उद्देश्य है कि इन एफपीओ को सीधे बड़े खरीदारों से जोड़ा जाए ताकि किसानों की आय में सुधार हो।
डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए होगी सीधी खरीद-फरोख्त
इस उद्देश्य से कृषि मंत्रालय एक विशेष वेब-आधारित प्लेटफॉर्म बनाने की तैयारी में है। इस प्लेटफॉर्म पर एफपीओ अपने बची हुई उपज का विवरण साझा करेंगे और होटल, रेस्ट्रां तथा निजी कंपनियां सीधे इनसे खरीद कर सकेंगी। देवेश चतुर्वेदी का कहना है कि होटल पहले भी स्थानीय मंडियों या रिटेल चेन से खरीद करते रहे हैं लेकिन अब वे अपने निकट मौजूद एफपीओ से जुड़कर अधिक लाभकारी सौदा कर सकते हैं।
उन्होंने बताया कि भारत की जीडीपी में कृषि का योगदान 18 प्रतिशत है, जबकि इसमें काम करने वाले लोगों की संख्या 46 प्रतिशत है। इसका सीधा अर्थ है कि किसानों को अभी भी उनकी मेहनत के अनुसार आय नहीं मिल रही। छोटे-छोटे खेत और बिखरी हुई खेती किसानों के लिए मुनाफा कमाने में बाधा बनती है। वहीं, खेत से बाजार तक की यात्रा में दाम कई गुना बढ़ जाते हैं और किसानों को उसका लाभ नहीं मिलता।
ऑर्गेनिक और GI टैग वाले उत्पादों को बढ़ावा मिलेगा
देवेश चतुर्वेदी ने यह भी कहा कि आज के समय में उपभोक्ता केमिकल फ्री और ऑर्गेनिक खाद्य पदार्थों को लेकर अधिक जागरूक हो चुके हैं। यदि होटल उद्योग किसानों के उन समूहों से जुड़ें, जो जैविक खेती करते हैं, तो दोनों को फायदा होगा। उपभोक्ताओं को शुद्ध भोजन मिलेगा और किसानों को बेहतर कीमत।
इसके साथ उन्होंने GI टैग वाले पारंपरिक खाद्य उत्पादों को बढ़ावा देने की भी बात कही। बासमती चावल के अलावा, भारत में अनाज, सब्जियां, फल और कई तरह के प्रोसेस्ड फूड जीआई टैग के साथ उपलब्ध हैं। उन्होंने कहा कि यदि होटल अपने मेन्यू में इन उत्पादों को शामिल करेंगे, तो विदेशी और देशी पर्यटकों को भारतीय खानपान की सांस्कृतिक विविधता को समझने का अवसर मिलेगा।
पर्यटन क्षेत्र को भी मिलेगा फायदा
पर्यटन मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव सुमन बिल्ला ने कहा कि जब कोई पर्यटक किसी राज्य में जाता है, तो वह वहां के पारंपरिक स्वाद और असली भोजन का अनुभव करना चाहता है। यदि होटलों को ताजा और स्थानीय उत्पाद आसानी से मिलेंगे, तो यह अनुभव और भी बेहतर होगा। उन्होंने कहा कि यह साझेदारी दोनों क्षेत्रों के लिए फायदे की स्थिति पैदा करेगी।
एफएचआरएआई करेगा सहयोग, सीधे संपर्क की सुविधा मिलेगी
फेडरेशन ऑफ होटल एंड रेस्टोरेंट एसोसिएशन ऑफ इंडिया ने घोषणा की है कि वे एफपीओ की एक विस्तृत सूची तैयार कर एक बुकलेट जारी करेंगे, जिसमें उनके उत्पाद और संपर्क की जानकारी होगी। साथ ही एक समर्पित सेल बनाया जाएगा, जो होटल उद्योग और किसानों को सीधे जोड़ने में मदद करेगा।
कैसे उठाया जा सकता है अधिकतम फायदा ?
होटल या रेस्ट्रां उद्योग में रोजाना खाद्य उत्पादों की मांग होती है। भारत में बहुत से होटल और रेस्ट्रां असंगठित क्षेत्रों में भी चल रहे हैं और वहां भी खाद्य उत्पादों की बहुत बडी मांग होती है। आमतौर पर इन जगहों पर आपूर्ति का काम खुदरा खरीद या सप्लाई चेन के माध्यम से होता है।
जब किसान उत्पादक संगठन यानी एफपीओ और खाद्य उत्पादों एवं फलों-सब्जियों की मांग वाले स्थानों के बीच सीधा संपर्क हो जाएगा तो बीच में मुनाफा कमाने वाला तंत्र पूरी तरह से गायब हो जाएगा। इसका सीधा सा सा फायदा खरीदने वाले और बेचने वाले दोनों को ही होगा। किसान को अपने उत्पाद पर ज्यादा मुनाफा और खरीदार को सस्ती कीमत पर खाद्य उत्पाद और वह भी ताजा।
क्या हो सकती हैं चुनौतियां ?
इस पहल के साथ कुछ बड़ी चुनौतियां भी जुड़ी हैं।
- सबसे बड़ी चुनौती तो यही है कि किसान उत्पादन संगठनों को डिजिटल माध्यमों से ऐप पर जोड़ने की है। बहुत से किसान उत्पादन संगठनों का अपना खुद का ऐप है वे उसके माध्यम से सफल कारोबार कर रहे हैं।
- दूसरी बड़ी चुनौती, यहां पर भी एक तरह से सप्लाई चेन ही हावी होगी। किसान उत्पादन संगठनों के भी अपने वेयर हाउस बनाने पड़ेंगे जहां वे अपने उत्पाद को संरक्षित कर सकेंगे और आवश्कता के अनुसार उसकी आपूर्ति करेंगे।
- तीसरा, किसान उत्पादन संगठनों के साथ स्थानीय सप्लाई चेन को जोड़ना या एक नई सप्लाई चेन को तैयार करना एक बड़ी चुनौती होगा।
