सूर्य देव से मन की ऊर्जा के साथ घर के लिए भी ऊर्जा मांगें…

सूर्य देव से मन की ऊर्जा के साथ घर के लिए भी ऊर्जा मांगें…

सिर्फ 2 रुपया यूनिट पड़ेगी सौर ऊर्जा

सरकार दे रही है कई तरह की सब्सिडी  

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ग्रामीण उपभोक्ता टीम

उपभोक्ता पाठशाला के इस अंक के पाठ में हम ग्रामीण उपभोक्ता के पाठकों और विशेषकर ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में रहने वाले लोगों को सौर ऊर्जा के बारे में बताएंगे। इन इलाकों में बिजली की पहुंच, उसकी उपलब्धता और उस पर आने वाला खर्च  हमेशा से एक चुनौती भरा सवाल रहा है। 

भारत प्राकृतिक लिहाज से हमेशा से एक सक्षम देश रहा है। यहां हर तरह के मौसम होते हैं और सूर्य़ की भरपूर रोशनी उपलब्ध रहती है। हरित ऊर्जा के क्षेत्र में सौर ऊर्जा का विशेष स्थान है। आज हम आपको सौर ऊर्जा और उसकी उपयोगिता के साथ उसे लेकर आपकी जेब पर किस तरह का असर पड़ेगा  इस बारे में बताएंगे।  

एनर्जी एंड एनवायरमेंट मटीरियल्स नामक जर्नल में प्रकाशित एक रिपोर्ट के निष्कर्षों के अनुसार दुनिया में सौर ऊर्जा अब बिजली का सबसे सस्ता स्रोत बन गई है। ब्रिटेन की यूनिवर्सिटी ऑफ सरे द्वारा किए इस नए अध्ययन में यह निष्कर्ष सामने आया है कि जिन देशों में अच्छी धूप खिलती है, वहां एक यूनिट बिजली पैदा करने की लागत घटकर महज दो रुपए (करीब 0.02 पाउंड) रह गई है।

देखा जाए तो सौर ऊर्जा उत्पादन की यह लागत बिजली के अन्य स्रोतों जैसे कोयला, गैस या पवन ऊर्जा से भी सस्ती है। युनिर्सिटी ऑफ सरे के एडवांस्ड टेक्नोलॉजी इंस्टीट्यूट (एटीआई) के वैज्ञानिकों का कहना है कि अब सोलर फोटोवोल्टिक (पीवी) तकनीक दुनिया को स्वच्छ और अक्षय ऊर्जा की ओर बढ़ते कदमों की मुख्य ताकत बन गई है।

अध्ययन से जुड़े निष्कर्षों के बारे में जारी एक प्रेस विज्ञप्ति में बताया गया है कि, अब सौर ऊर्जा इतनी सस्ती हो गई है कि ब्रिटेन जैसे देश में भी, जो भूमध्य रेखा से 50 डिग्री उत्तर में स्थित है, यह बड़े पैमाने पर बिजली उत्पादन का सबसे किफायती तरीका बन चुकी है। प्रेस विज्ञप्ति में बताया गया कि, 2024 तक दुनिया में 1.5 टेरावॉट से अधिक सौर ऊर्जा क्षमता स्थापित की जा चुकी है, जो 2020 की तुलना में दोगुनी है और करोड़ों घरों को बिजली देने के लिए पर्याप्त है। विज्ञप्ति में कहा गया कि, अब सौर तकनीक दूर की कौड़ी नहीं रही, बल्कि यह कम-कार्बन और ऊर्जा के सतत भविष्य की मजबूत नींव बन चुकी है।

सस्ती बैटरियां और सौर ऊर्जा

अध्ययन में यह भी सामने आया है कि लिथियम-आयन बैटरियों की कीमत 2010 से अब तक 89 फीसदी गिर चुकी है। इसके चलते सौर ऊर्जा को बैटरियों में स्टोर कर जब चाहें इस्तेमाल करना संभव हो गया है। 

इससे सौर ऊर्जा और बैटरी वाले सिस्टम (सोलर-प्लस-स्टोरेज) की लागत अब गैस पावर प्लांट्स जितनी सस्ती हो गई है। ऐसे हाइब्रिड सिस्टम जिनमें सोलर पैनल और बैटरी दोनों शामिल होते हैं, अब कई देशों में आम हो गए हैं।

ये दिन में बनी सौर ऊर्जा को स्टोर कर जरूरत पड़ने पर इस्तेमाल करने की सुविधा देते हैं, जिससे यह और अधिक भरोसेमंद हो जाते हैं। इससे बिजली की उपलब्धता लगातार बनी रहती है।

लेकिन, चुनौतियां अब भी हैं बरकरार

हालांकि, अध्ययन में वैज्ञानिकों ने कुछ चुनौतियों की ओर भी इशारा किया है खासकर मौजूदा बिजली नेटवर्क से बढ़ती सौर ऊर्जा को जोड़ना अब एक बड़ी चुनौती बन चुका है। कैलीफोर्निया और चीन जैसे क्षेत्रों में सौर ऊर्जा के भारी उत्पादन के कारण बिजली ग्रिड पर दबाव बढ़ गया है और जब आपूर्ति मांग से अधिक होती है, तो ऊर्जा बर्बाद हो जाती है।

इसी अध्ययन मे यह भी कहा गया है कि, अब सबसे बड़ी चुनौती यह है कि बढ़ती सौर ऊर्जा को बिजली नेटवर्क से कैसे जोड़ा जाए। इसके लिए स्मार्ट ग्रिड, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित पूर्वानुमान और क्षेत्रों के बीच मजबूत कनेक्शन जरूरी होंगे।

 ऊर्जा भंडारण और स्मार्ट ग्रिड तकनीक के एकीकरण के साथ सौर ऊर्जा भरोसेमंद, सस्ती और बड़े पैमाने पर स्वच्छ ऊर्जा प्रदान करने में सक्षम हो सकती है। पेरोव्स्काइट सोलर सेल्स जैसी नई सामग्री से बिजली उत्पादन को भी 50 फीसदी तक बढ़ाया जा सकता है। अच्छी बात यह है कि इसके लिए अतिरिक्त जमीन की जरूरत भी नहीं पड़ेगी।

विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि सौर ऊर्जा के क्षेत्र में प्रगति लंबे समय तक नीतिगत समर्थन पर निर्भर करेगी। अमेरिका का इन्फ्लेशन रिडक्शन एक्ट, यूरोप का आरईपावरईयू प्लान और भारत की उत्पादन आधारित प्रोत्साहन योजना (पीएलआई) इस दिशा में उठाया सार्थक कदम हैं। 

विज्ञप्ति में कहा गया है कि, स्पष्ट नीतियां, सतत निवेश और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग ही दुनिया को स्वच्छ और विश्वसनीय ऊर्जा प्रणाली की ओर तेजी से ले जा सकते हैं।

आपका पाठ 

हम आपको बताना चाहते हैं कि, भारत सरकार ने हरित ऊर्जा के क्षेत्र में बहुत ही आक्रामक रणनीति अपनाते साल 2030  तक मौजूदा हरित ऊर्जा उत्पादन को दोगुना करने का लक्ष्य रखा  है। रिपोर्टो के अनुसार सरकार ने यह लक्ष्य समय से पहले ही हासिल कर लेने का अनुमान लगाया है।

सरकार ने सौर ऊर्जा के उत्पादन और इस्तेमाल को बढ़ाने के लिए तमाम तरह की योजनाएं चलाई हुई हैं। गावों में किसानों के लिए सूर्यकिरण योजना है जिस पर सरकार किसानों को भारी सब्सिडी देती है। घरेलू इस्तेमाल के लिए भी सरकार ने सौर पैनलों को लगाने पर भारी सब्सिडी दी हुई है।

समझदारी इसी में है कि सरकार से मिलने वाली इस सहूलियत का भरपूर इस्तेमाल किया जाए। साथ ही इसी उपक्रम में पर्यावरण की बेहतरी के लिए भी काम हो जाए तो क्या बुरा है? अंत में इन सबका फायदा तो इंसान को ही मिलना है यानी अच्छे पर्यावरण के साथ जेब पर कम भार।