हवा-हवाई’, हवाई अड्डों के खुलने और बंद होने की कहानी

हवा-हवाई’, हवाई अड्डों के खुलने और बंद होने की कहानी

यूपी समेत देश के तमाम हवाई अड्डों से बिजनेस नहीं मिलने पर सेवा ठप

हवाई अड्डों के निर्माण में दूरी और यात्रियों की उपलब्धता का क्राइटेरिया क्यों नहीं

चुनाव में नेतागिरी की विषय बन कर रह गई हैं हवाई अड्डों की घोषणा

……………………………………………………………………………… 

 

देश के दूर दराज के ग्रामीण लोगों को हवाई यात्रा का सपना दिखाना जितना आसान है, उससे ज्यादा उस सपने को अमलीजामा तक पहुंचाना मुश्किल है। किराया आसमान छू रहा है और लोग सौ -डेढ़ सौ, दो सौ किलोमीटर की यात्रा भला पांच से दस हजार और उससे उपर के किराए में रूचि नहीं रख रहे। यही कारण है कि इस समय उत्तरप्रदेश सहित देश के करीब दस हवाई अड्डे उदघाटन के बाद यात्री की बाट जोहते जोहते बंद होने के कगार पर पहुंच गए है। क्या हवाई अड्डे का उदघाटन ही विकास का पैमाना है? उसके इतर भी तो कई मूलभूत आवश्यकताएं होती है। करोड़ो रुपए खर्च करने के बाद जब हवाई अड्डा बंद हो जाए तो फिर उसकी लागत से लेकर वहां तैनात केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल सहित अन्य कर्मचारियों के वेतन भत्ते भी सरकार पर बोझ ही साबित हो रहे है। इसके पीछे के कारणों पर सरकार ध्यान नहीं दे रही और लोक लुभावन नारों के बीच बिना आगे पीछे सोचे अत्याधुनिक हवाई सफर का पहले एलान किया गया और फिर उदघाटन कर वाहवाही लूटी गई।

चुनावी घोषणाएं और हवाई अड्डे 

लोकसभा चुनाव 2024 को ध्यान में रखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उत्तरप्रदेश के चित्रकूट हवाईअड्डे का आभासी तरीके से उदघाटन दस मार्च को कर दिया। स्थानीय लोगों को लगा कि चित्रकूट (बुंदेलखंड) को अपना पहला हवाई अड्डा मिल गया। शुरुआत में चित्रकूट से लखनऊ की उड़ानें शुरू हुईं। हफ्ते में चार दिन उड़ानें होती थीं, लेकिन धीरे-धीरे ये कम होती गईं। चार महीने बीते और हवाई उड़ानें पूरी तरह से बंद हो गईं। पिछले करीब एक साल से यहां से कोई यात्री विमान उड़ान नहीं भर सका। यात्रियों की संख्या कम होने जैसे इसके कारणों पर अब सरकार ध्यान दे रही है। 

इसी तरह 2022 के उत्तरप्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले प्रधानमंत्री ने 20 अक्टूबर, 2021 को कुशीनगर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे का उद्घाटन किया। तत्कालीन नागरिक उड्डयन मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मौजूदगी में उदघाटित इस हवाई अड्डे से भी करीब चार साल हो गए कोई भी विमान विदेश के लिए उड़ान नहीं भर सका।

लागत, रख-रखाव और कर्मचारियों पर खर्च  

चित्रकूट हवाई अड्डा करीब 146 करोड़ रुपए की लागत से तैयार हुआ था। यहां से लखनऊ का 250 किलोमीटर का सफर 55 मिनट में पूरा होता था। शुरुआत में हफ्ते में दो दिन विमान उड़ान भरता था। बाद में चार दिन हो गया। लेकिन, 16 दिसंबर, 2024 से उड़ानें बंद हो गईं। चित्रकूट हवाई अड्डे में करीब 70 कर्मचारी कार्यरत हैं। सुरक्षा के लिए करीब 40 सीआईएसएफ के जवान बाकी कुछ अलग कर्मचारी भी हैं। कर्मचारी ड्यूटी पर आ रहे हैं लेकिन विमान उड़ान नहीं भर रहा। हवाई अड्डा प्रशासन कई प्रकार की समस्याएं बता रहा हैं। हवाई अड्डा निदेशक दबी जुबान से कहते हैं कि जिस कंपनी को वहां से उड़ानें शुरू करनी थी अब वह कतरा रही है। एक तरह से हाथ खड़े कर दिए हैं, अब सरकार को तय करना है कि वो क्या फैसला लेगी? 

यूपी में 7 जगह से उड़ानें ठप

उत्तरप्रदेश में इसी तरह से एक अंतरराष्ट्रीय सहित सात उड़ानें बंद हो गई। अभी जहां-जहां और हवाई अड्डा निर्माण का काम चल रहा, वहां भी इस बात की आशंका है कि बहुत ज्यादा उड़ानें नहीं हो पाएंगी। क्योंकि, उनके पास के जिले से पहले ही उड़ानें जारी हैं।

देश के एक बड़े दैनिक अखबार और एक निजी चैनल ने इस तरह उड़ान बंद होने के बाद हवाईअड्डों के शटर गिराने पर चिंता जाहिर करते हुए चौंकाने वाली रिपोर्ट प्रकाशित और प्रसारित की है।

रेलवे स्टेशन और बस अड्डा नहीं लेकिन सपना हवाई अड्डे का 

उत्तरप्रदेश के श्रावस्ती में रेलवे स्टेशन नहीं है लेकिन केंद्र सरकार ने बिना कुछ सोचे- विचारे हवाई अड्डे का उदघाटन कर दिया। लखनऊ से इस जिले की दूरी 153 किलोमीटर है। श्रावस्ती में न रेलवे स्टेशन न ही कोई सरकारी बस अड्डा है। लोग दूसर शहर जाकर बस और ट्रेन पकड़ते हैं। ऐसे में हवाई अड्डे का उदघाटन किस बिना पर किया गया, यह जबाब किसी के पास नहीं है। फिर श्रावस्ती हवाई अड्डे का हश्र भी चित्रकूट की तरह साबित हुआ और वह इस समय बंद है। दस मार्च, 2024 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशभर में 12 हवाई अड्डे के टर्मिनल भवनों का उद्घाटन किया। इसमें उत्तरप्रदेश के चित्रकूट, आजमगढ़, श्रावस्ती, मुरादाबाद, अलीगढ़ कुशीनगर हवाई अड्डों के अलावा दूसरे राज्यों में भावनगर, लुधियाना, पाकयोंग में भी लोगों को हवाई सफर का सपना दिखाया गया। लेकिन इस समय ये सभी हवाई अडडे बंद पड़े हैं। कहीं एक साल तो कहीं डेढ़ साल तक ही वहां से उड़ानें भरी गई।

कुशीनगर हवाई अड्डे के निदेशक का कहना है कि कई प्रकार की अड़चने आने के के बाद मामला अदालत में है। विमान सेवा कब शुरू होगी कुछ नहीं कहा जा सकता। यहां भी 170 कर्मचारियों के साथ 150 सीआईएसएफ जवान और 20 अन्य हवाई अड्डा कर्मचारी बैठे बैठे वेतन ले रहे हैं। कुशीनगर हवाई अड्डे की कुल लागत करीब 260 करोड़ रुपए थी। उद्घाटन के दिन श्रीलंका के कोलंबो से उस वक्त के खेल मंत्री नमल राजपक्षे समेत 125 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल आया था। इसमें ज्यादातर बौद्ध भिक्षु थे। यहां के बौद्ध स्थलों पर जाने के बाद सभी वाराणसी पहुंचे। मार्च 2022 में भी कुछ लोगों को लेकर एक विमान वियतनाम से यहां पहुंचा था। सात नवंबर, 2023 से विमान सेवा बंद है।

 

सहारनपुर से एक भी उड़ान नहीं 

उत्तर प्रदेश का एक अन्य हवाई अड्डे सहारनपुर का भी उद्घाटन हुआ, लेकिन आज तक एक भी उड़ान नहीं भरी गई। 20 अक्टूबर, 2024 को 65 एकड़ जमीन पर 55 करोड़ की लागत से बने सहारनपुर हवाई अड्डे से जनता हवाई सफर की बाट आज तक जोह रही है। 

एक शहर से दूसरे शहर की दूरी नहीं देखी गई

हवाई अड्डों के निर्माण की घोषणा के समय एक से दूसरे शहर की दूरी नहीं देखी गई। प्रयागराज हवाई अड्डा से चित्रकूट की दूरी महज 101 किलोमीटर है। इसी तरह गोरखपुर हवाई अड्डे से आजमगढ़ की दूरी 116 किलोमीटर है। गोरखपुर हवाई अड्डे से तो कुशीनगर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा की दूरी महज 51 किलोमीटर ही है। इसी तरह लखनऊ से श्रावस्ती की दूरी करीब 170 किलोमीटर है। अयोध्या हवाई अड्डे से श्रावस्ती महज 110 किलोमीटर ही है। लखनऊ से पलिया की दूरी 160 किलोमीटर है। आगरा हवाई अड्डे से अलीगढ़ की दूरी 90 किलोमीटर है। इसी तरह मुरादाबाद से नोएडा और गाजियाबाद की भी दूरी 200 किलोमीटर से कम है। इन सारे हवाई अड्डों से उड़ानों के बंद होने के पीछे पहले से चल रहे कुछ हवाई अड्डे भी एक बड़ी वजह हैं। यही नहीं अभी सोनभद्र के म्योरपुर में भी हवाई अड्डे का निर्माण का काम जारी है। सोनभद्र का हवाई अड्डा 2022 में ही बन जाना था। लेकिन, पार्किंग से जुड़ी जमीन का मामला अदालत तक पहुंच गया। अदालत में लंबे वक्त तक स्टे रहने के बाद भी पिछले महीने उत्तरप्रदेश सरकार के मंत्री रवींद्र जायसवाल यहां पहुंचे और कहा कि सरकार हर मंडल में हवाई अड्डा का निर्माण करना चाहती है। मिर्जापुर मंडल का यह हवाई अड्डा भी जल्द शुरू करने का प्रयास चल रहा है।

 

उत्तरप्रदेश में इस समय तीन अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे- वाराणसी, लखनऊ और अयोध्या से उड़ाने भरी जा रही हैं। इसके अलावा पांच घरेलू हवाई अड्डों से अलग-अलग शहरों के लिए लगातार उड़ाने जा रही हैं। इनमें प्रयागराज, कानपुर, गोरखपुर, गाजियाबाद और बरेली शामिल हैं। यहां से अलग-अलग हवाई जहाज की कंपनियों के विमान लगातार उड़ान भर रहे हैं। अब जो नए हवाई अड्डे उद्घाटन के बाद बंद हुए हैं, उनमें से ज्यादातर इन्हीं शहरों के आसपास बने हैं। इस वजह से भी वहां यात्रियों की संख्या विमान के लिए पर्याप्त नहीं हो पा रही है। यही नहीं इस समय पांच अन्य जिलों में भी हवाई अड्डे प्रस्तावित हैं जिनमें मेरठ, ललितपुर, सोनभद्र, लखीमपुर खीरी, नोएडा शामिल है। मेरठ के परतापुर में पिछले महीने हवाई अड्डा अथारिटी आफ इंडिया और जिला प्रशासन ने हवाई अड्डे का निरीक्षण किया। 

दिल्ली से सटे नोएडा में जेवर हवाई अड्डे का शिलान्यास प्रधानमंत्री ने कर दिया है। यह एशिया का सबसे बड़ा हवाई अड्डा होगा। यहां एक साथ 178 विमान खड़े करने की सुविधा के साथ छह रनवे बनाए जा रहे हैं। दिसंबर में शायद इस हवाई अड्डे से उड़ाने शुरू हो जाए। 

हवाई अड्डों के खुलने और बंद होने की इस कहानी से जाहिर होता है कि अब देश में सरकारी घोषणाओं और जनता के पैसे की बर्बादी की कोई जवाबदेही नहीं है।  ताजातरीन उदाहरण  बिहार में पूणियां और दरभंगा के हवाई अड्डे हैं जिनकी घोषणा भी चुनावी नफे को देखते हुए कर दी गई है जबकि वहां तमाम बुनियादी सुविधाओं का अकाल है। आशंका इसी बात की है कि देर-सबेर हवाई किराया और मूलभूत सुविधाओं के अभाव में इन हवाई अड्डों का भी वही हश्र होने वाला है जो बिहार के पड़ोसी राज्य उत्तरप्रदेश में सामने आया है।