बैंड-बाजा- बारात और बाजा़र

बैंड-बाजा- बारात और बाजा़र

शाहखर्च शादियों से सरकार को भारी राजस्व

भारत में शादियां स्टेटस सिंबल बनीं

बाजार में उत्सवी माहौल, जमकर खरीदारी

खुदरा रोजगार के अवसरों में बढ़ोतरी

……………………………………….

कुछ तथ्य :  भारत में शादियों पर अमेरिका के मुकाबले दोगुना खर्च

भारत में पढ़ाईलिखाई की तुलना में शादियों पर दोगुना खर्च

इस शोशीबाजी में कहां खड़ा है भारत

सवाल, सरकार से नहीं, आपसे है, जवाब भी आपको ही देना, सोचिएगा जरूर

————————————
बिनोद आशीष

इंट्रो
इन दिनों देश में शादियों का समय चल रहा है। उत्सवी माहौल है। बाजारों में जमकर खरीदारी चल रही है। कपड़ेलत्तों से लेकर गहने, फर्नीचर और कारों की बिक्री में उछाल आया है। कोई अपनी हैसियत दिखाने की होड़ में है तो कोई अपनी हैसियत से आगे बढ़चढ़ कर इस होड़ में शामिल है। शादियों के इस मौसम में खुदरा रोजगार के मौके भी खूब पैदा होते हैं। अर्थ व्यवस्था के लिहाज से शादियां सरकार को खूब राजस्व भी देती हैं। कुल मिलाकर देखा जाए तो मामला, देने वाला भी खुश और पाने वाला भी खुश जैसा है। लेकिन, सवाल ये है कि, क्या भारत जैसे गरीब देश में शादियों पर बेइंतेहा खर्च होना चाहिए? क्या आपको पता है कि भारत में शादियों पर होने वाला खर्च अमेरिका में शादियों के खर्च के मुकाबले दोगुना है। यही नहीं, भारत के लोग शादियों पर पढ़ाईलिखाई के मुकाबले भी दोगुना खर्च करते हैं। ग्रामीण उपभोक्ता की इस कवर स्टोरी में भारत में शादियों के तामझाम की विस्तृत और तुलनात्मर समीक्षा की गई है। 

………………………………………………………………………………………………………………………       

भारत में शादियां अब दिखावे और बेतरतीब खर्च का उत्सव मनाने का दूसरा नाम बन गई हैं। भारत दुनिया भर में सबसे बड़ा विवाह स्थल बन गया है। शादी हर किसी की ज़िंदगी का सबसे खास पल होता है जिसे दूल्हादुल्हन और उनके परिजन यादगार बनाना चाहते हैं। भारतीय शादी कई दिनों तक चलती हैं और इसका रूप साधारण से लेकर बेहद भव्य तक हो सकता है।  इसमें क्षेत्र, धर्म और आर्थिक पृष्ठभूमि की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। शादी तय होने के बाद ही उसकी तैयारी शुरू हो जाती है। कार्ड छपाने से लेकर वैंक्वेट हाल, सजावट, खानेपीने का बंदोवस्त, घोड़ा बग्गी, वीडियोग्राफी के बाद लड़की की विदाई के समय सुख सुविधाओ के तमाम लग्जरी सामानों के साथ लिफ़ाफ़े लेन देन को भी हैसियत के हिसाब से तय किया जाने लगा है। इसमें लाखोकरोड़ों के खर्च को देखते हुए और समाज में खुद को अव्वल दिखाने की होड़ में  हालातऔरखराबहोगएहैं।


खर्च इतना कि पाकिस्तान का बजट भी फीका

शादियों पर खर्च को आंकलन करने वाले और शादी समारोह से जुड़े आर्थिक विशेषज्ञों का अनुमान है कि भारत में इस साल शादियों में इतना खर्च होगा कि पाकिस्तान का बजट भी फीका पड़ जाएगा। एक रिपोर्ट के अनुसार, शादियों में खर्च पिछले कुछ सालों में तेज़ी से बढ़ा है। यह भारी खर्च भारतीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में मदद करेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि अब इसी माह से शुरू हुए 45 दिनों के वैवाहिक सीजन में ही भारतीय बैंड बाजे और विवाह के लिए रिकार्ड 6.5 लाख करोड़ रुपये खर्च किए जाने का अनुमान है। यह पाकिस्तान के कुल बजट 5.5 लाख करोड़ रुपये से एक लाख करोड़ रुपये अधिक है। एक नवंबर से तुलसी विवाह के साथ शुरू हुए वैवाहिक मौसम में इस बार देश भर में 46 लाखसेअधिकजोड़ोंकेदांपत्यजीवनमेंबंधनेकाअनुमानहै।इसमेंपारंपरिकशादियोंकेसाथडेस्टिनेशनवेडिंगभीशामिलहैं।

वैसे, पिछली बार दो लाख अधिक कुल 48 लाख विवाह हुए थे, लेकिन कारोबार 5.90 लाख करोड़ का ही हुआ था। विवाह का शुभ मुहुर्त एक नवंबर से 14 दिसंबर तक है। इस दौरान अकेले दिल्ली में 4.8 लाख शादियां होंगी, जिससे 1.8 लाख करोड़ रुपये का कारोबार होगा।

कैट का देश के 75 प्रमुख शहरों में सर्वेक्षण

व्यापार जगत की सबसे बड़ी राष्ट्रीय संस्था कन्फेडरेशन ऑफ आल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) की अनुसंधान शाखा कैट रिसर्च एंड ट्रेड डेवलपमेंट सोसाइटी (सीआरटीडीएस) ने देश के 75 प्रमुख शहरों में 15 से 25 अक्टूबर के बीच अध्ययन कराया था। इस अध्ययन में पता चला कि भारत कीवैवाहिक अर्थव्यवस्था  घरेलू व्यापार का मजबूत स्तंभ बनी हुई है, जो परंपरा, आधुनिकता और आत्मनिर्भरता का संगम है।

पिछले साल की तुलना में शादियां कम होगी

अध्ययन के अनुसार, पिछले वर्ष 2024 में देशभर में लगभग 48 लाख विवाह हुए थे, जिससे 5.90 लाख करोड़ का व्यापार हुआ था। वहीं, 2023 में 38 लाख शादियों से करीब 4.74 लाख करोड़ और 2022 में 32 लाख शादियों से 3.75 लाख करोड़ का कारोबार हुआ था। वैसे, पिछले वर्ष की तुलना में शादियों की संख्या इस वर्ष कम होने का अनुमान है, लेकिन प्रति शादी खर्च में उल्लेखनीय वृद्धि होने का अनुमान है। इसकी प्रमुख वजह बढ़ती आय, सोने चांदी की कीमतों में वृद्धि और त्योहारी सीजन में उपभोक्ता विश्वास का बढ़ना है।

कैट का ब्यौरेवार अध्ययन

कैट के अध्ययन में यह भी सामने आया कि परिधान, आभूषण, सजावट सामग्री, बर्तन, कैटरिंग आइटम समेत शादी से जुड़े 70 प्रतिशत से अधिक सामान भारत निर्मित हैं। पारंपरिक कारीगरों, ज्वैलर्स और वस्त्र उत्पादकों को भारी आर्डर मिल रहे हैं, जिससे भारत की स्थानीय विनिर्माण क्षमता और हस्तकला को नया बल मिल रहा है। इसी तरह, 45 दिवसीय शादी के मौसम में सरकारों को भी लगभग 75 हजारकरोड़काराजस्वप्राप्तहोगा।


डिजिटल ट्रेंड्स पर भी होगा खर्चा

डिजिटल और आधुनिक ट्रेंड्स पर भी खर्च होगा। शादी के बजट का एक से दो प्रतिशत डिजिटल कंटेंट निर्माण और इंटरनेट मीडिया कवरेज पर खर्च होता है, जिसमें एआइ आधारित निमंत्रण पत्र व वीडियो के साथ कार्यक्रम तैयार हो रहे हैं।
दिल्ली में इस मौसम होने वाली 4.8 लाख शादियों से 1.8 लाख करोड़ का व्यापार होगा, जिसमें सबसे अधिक खर्च आभूषण, फैशन और शादी के स्थान पर होगा। जबकि, राजस्थान और गुजरात में भव्य व डेस्टिनेशन वेडिंग्स का चलन बढ़ रहा है। उत्तर प्रदेश और पंजाब में पारंपरिक सजावट और कैटरिंग पर भारी खर्च देखा जा रहा है।

बैंक्वेट सेवाओं के साथ रोजगार

महाराष्ट्र व कर्नाटक में समारोह प्रबंधन और बैंक्वेट सेवाओं की मांग बढ़ी है। दक्षिणी राज्यों में हेरिटेज और मंदिर शादियों के कारण पर्यटन को बढ़ावा मिल रहा है। इसी तरह, इस बार के शादी आयोजनों से एक करोड़ से अधिक अस्थायी और अंशकालिक रोजगार सृजित होने की संभावना है, जिससे डेकोरेटर, कैटरर, फ्लोरिस्ट, कलाकार, परिवहन और सेवा क्षेत्र के लोग सीधे लाभान्वित होंगे। वस्त्र, गहने, हस्तशिल्प, पैकेजिंग और ढुलाई जैसे एमएसएमई क्षेत्रों को भी मौसमी बढ़ावा मिलेगा, जिससेदेशकीअर्थव्यवस्थाऔरमजबूतहोगी।


खर्च के प्रमुख क्षेत्र

शादी का खर्च विभिन्न वस्तुओं और सेवाओं के क्षेत्रों में फैला हुआ है। कैट के अनुमानों के अनुसार, 6.5 लाख करोड़ के कुल खर्च में प्रमुख क्षेत्रों में अनुमानित रूप से आभूषण पर 15 फीसद, वस्त्र और साड़ियों पर 10 फीसद, कैटरिंग सेवाओं पर 10 फीसद, इवेंट मैनेजमेंट पर 10 फीसद, इलेक्ट्रानिक्स व इलेक्ट्रिकल्स उपकरण पर 5 फीसद, अन्य सेवाएं (डेकोरेशन, फ़ोटोग्राफी, यात्रा) पर करीब 20 फीसद इसके आलावा किराना, मिठाई, गिफ्ट आइटम पर 15 फीसद शामिल है।

महंगी शादियों का उजला पक्ष

राजधानी दिल्ली में शादी के मौसम की रौनक शुरू होते ही बाजारों में उत्साह और तेजी का माहौल दिखने लगा है। इस मौसम में एक करोड़ से अधिक लोगों को अस्थायी और अंशकालिक रोजगार मिलने के साथ ही अनुमान यह भी है कि इस व्यापार से सरकार को 75,000 करोड़ का टैक्स राजस्व (जीएसटी सहित) प्राप्त होगा।

यही नहीं, 70 फीसद से अधिक शादीसंबंधी खरीदारीमेड इन इंडियाउत्पादों की हो रही है। इसमें परिधान, आभूषण, सजावट सामग्री, बर्तन, कैटरिंगआइटमऔरउपहारशामिलहैं।


शादी उद्योग से भारी तादाद में रोजगार का भी सृजन होता है। इसमें सेवा प्रदाता डेकोरेटर, कैटरर, फ़ोटोग्राफर, वीडियोग्राफर, ट्रांसपोर्टर, इवेंट प्लानर, म्यूजिकल ग्रुप और हास्पिटैलिटी (होटलरेस्तरां) कर्मचारी सीधे तौर पर लाभान्वित होते हैं। वस्त्रों के छोटे निर्माता, कारीगर, स्थानीय फूल विक्रेता, लाइटिंग और साउंड प्रोवाइडर, तथा पैकेजिंग उद्योग भी इस मौसम से बड़ी मांग देखते हैं। रोजगार स्थानीय पर्यटन, होटल उद्योग और राज्यों की अर्थव्यवस्था को बल दे रहा है। डिजिटल निमंत्रण, सोशल मीडिया कवरेज, और एआईआधारित वेडिंग प्लानिंग टूल्स में भी लगभग 25 फीसद की वृद्धि दर्ज की गई है, जो आधुनिकता के साथ पारंपरिक आयोजन का मिश्रण है।

 

कुछ दिलचस्प तथ्य

अमेरिका के मुकाबले भारत में शादियों पर दोगुना  खर्च

ब्रोकरेज फर्म जेफरीज की रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय लोग फूड और ग्रोसरी के बाद सबसे अधिक खर्च शादियों पर करते हैं। जेफरीज का अनुमान है कि भारत में एक शादी पर औसतन खर्च लगभग 15,000  डॉलर यानी 12.5 लाख रुपए है। यानी भारतीय परिवार अपनी औसत सालाना आय 4 लाख रुपए से 3 गुना अधिक खर्च शादियों पर करते हैं। भारत में शादी पर प्रति व्यक्ति आय से 5 गुना अधिक खर्च किया जा रहा है।
भारत में शादियों पर मोटा खर्च करने का चलन काफी पुराना है। कुछ लोग दहेज के कारण तो कुछ लोग अपनी शानशौकतदिखानेकेलिएशादियोंपरखूबखर्चकरतेहैं।यहीवजहहैभारतशादीकाबड़ामार्केटबनताजारहाहै।

जेफरीज की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में शादियों का बाजार 130 अरब डॉलर यानी 10.9 लाख करोड़ रुपए से अधिक हो गया है। यह चीन से कुछ कम तो अमरीका के मुकाबले दोगुना है। ब्रोकरेज फर्म जेफरीज ने एक रिपोर्ट में कहा, भारतीय विवाह उद्योग अमेरिका (70 अरब अमेरिकी डॉलर) के उद्योग के आकार का लगभग दोगुना है। हालांकि, यह चीन (170 अरब अमेरिकी डॉलर) से छोटा है।

पढ़ाईलिखाई के मुकाबले शादीब्याह पर डबल खर्च करते हैं भारतीय

आम भारतीय शिक्षा के मुकाबले शादीब्याद के समारोह में दोगुना खर्च करते हैं। ब्रोकरेज फर्म जेफरीज की रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत में विवाह पर शिक्षा (स्नातक तक) की तुलना में दोगुना खर्च किया जाता है, जबकिअमेरिकाजैसेदेशोंमेंयहखर्चशिक्षाकीतुलनामेंआधेसेभीकमहै।

दुल्हन की ज्वैलरी से आता है आधा राजस्व

भारत में हर साल ज्वैलरी इंडस्ट्री का 50 फीसदी से ज्यादा रेवेन्यू दुल्हन की ज्वैलरी की बिक्री से आता है। 


डेस्टिनेशन और वेसिनेशन वेडिंग का चलन?

जब वर और वधू पक्ष अपने घरों से दूर किसी स्थान पर शादी करते हैं तो उसे डेस्टिनेशन वेडिग का नाम दिया जाता है। यह स्थान आमतौर पर कोई पर्यटन स्थल होता है। दोनों पक्ष अपने अतिथियों समते वहीं आ जाते शादी की रस्में वहीं होती हैं। शादी समारोह आमतौर पर दो दिन से लेकर तीन या पांच दिनों का होता है। डेस्टिनेशन वेडिंग पिछले कुछ समय से काफी लोकप्रिय हो गई हैं। कोविड के समय से डेस्टिनेशन वेडिंग का चलन बढ़ा है। डेस्टिनेशन वेडिंग ना केवल दूल्हादुल्हन और रिश्तेदारों को एक अलग अनुभव देती है, बल्किइसकेज़रिएएकनयादेशयाभारतकीहीकोईनईजगहदेखनेऔरघरसेदूरमौजमस्तीकरनेकोमिलजातीहै।


कई लोगों के लिए डेस्टिनशन वेडिंग काफी महंगी और बजट के बाहर हो सकती है। लेकिन लोगों ने इसका तोड़ भी निकाल लिया है। दरअसल इन दिनों वेसीनेशन वेडिंग का चलन शुरू हो रहा है। ये वेडिंग्स बजट फ्रेंडली होती हैं। वेसिनेशन वेडिंग अपने बजट में की जा सकती है।
वेसिनेशन वेडिंग्स, डेस्टिनेशन वेडिंग का ही एक छोटा रूप होती हैं।इसमें वरवधूअपनेपरिवारऔरकरीबीदोस्तोंकेसाथअपनेघरेलूशहरमेंयाउसकेआसपासकीकिसीबढ़ियासीजगहपरशादीकरनेकेलिएजातेहै।

 

भारत में शादियां और कानून


विवाह का अधिकार भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत एक मौलिक अधिकार है, जो जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता की गारंटी देता है। यह अधिकार वयस्कों को बिना किसी हस्तक्षेप के अपने जीवनसाथी को चुनने की स्वतंत्रता प्रदान करता है, चाहे वह परिवार, समाज या राज्य की ओर से हो। सुप्रीम कोर्ट ने बारबार इस अधिकार को बनाए रखा है और यह कहा है कि विवाह एक व्यक्तिगत निर्णय है, जिसका सम्मान किया जाना चाहिए क्योंकि यह व्यक्ति की गरिमा  और स्वायत्तता का हिस्सा है। राज्य या समाज इस व्यक्तिगत स्वतंत्रता पर कोई प्रतिबंध नहीं लगा सकता।
सांसद रंजीत रंजन ने शादियों में होने वाले खर्चों को नियंत्रित करने के लिए एक कानून बनाने की मांग की थी। उन्होंने संसद के बजट सत्र में शादी बिल ( जरूरी रजिस्ट्रेशन और फालतू खर्च रोकने) पेशकियाहै।यहएकप्राइवेटसदस्यकाबिलथाऔरइसकोकैबिनेटकीमंजूरीनहींमिलीऔरनहीसत्तापक्षकेकिसीसदस्यनेइसेपटलपररखा।


सरकारी समिति की सिफारिश
विवाह समारोह में प्रीतिभोज, घर की सजावट, स्वागतसत्कार और दूल्हादुल्हन के साजसामान पर कितना खर्च करें, यह आपकी आय पर निर्भर करेगा। सरकार की एक उच्चाधिकार समिति ने सिफारिश की है कि शादी में होने वाले खर्च को आय से जोड़ा जाए। इस खर्च में दहेज, उपहार आदि शामिल रहेगा।
महिला सशक्तीकरण से संबंधित योजना आयोग के कार्यकारी समूह की सिफारिशों को दहेज रोकथाम कानून के प्रावधानों को मजबूत करने के प्रयासों के रूप में देखा जा रहा है। यह कानून लागू हुए 28 साल बीत चुके हैं, लेकिन देश में अभी भी दहेज प्रताड़ना की घटनाएं होती रहती हैं।
महिला व बाल विकास मंत्रालय में सचिव की अध्यक्षता में गठित समूह ने कहा कि शादी में होने वाले खर्च की सीमा को प्रीतिभोज में परोसे जाने वाले भोजन पर भी लागू किया जा सकता है। हालांकि समूह ने यह भी कहा कि विवाह खर्च की सीमा को संबंधित व्यक्ति की आय से जोड़ा जा सकता है।


समूह की सिफारिशें 70 के दशक में लाए गए मेहमान नियंत्रण आदेश की याद दिलाती है। इस आदेश में महत्वपूर्ण पारिवारिक समारोहों में अतिथियों की संख्या पर पाबंदी का प्रावधान था। लेकिन बाद में यह आदेश रद्द कर दिया गया क्योंकि इसे व्यावहारिक नहीं पाया गया।

आयकर मुक्त तोहफे
आयकर अधिनियम 1961 की धारा 56 के अनुसार: दूल्हा और दुल्हन को शादी के मौके पर रिश्तेदारों और मित्रों से जो भी तोहफा मिलता है, वह टैक्स फ्री होता है। चाहे वह कैश हो या कोई वस्तु, उसपरटैक्सनहींलगेगा।