हमारे देश में राजनेताओं की एक लंबी फेहरिस्त है। कुछ को लोग जान पाते हैं, वे चर्चा में रहते हैं, लेकिन बहुत से ऐसे लोग भी रहे हैं जिन्हें लोगों ने कम जाना, कम समझा। उन लोगों का योगदान भी दूसरे शीर्ष नेताओं से कम नहीं था बस, उनकी चर्चा कम हुई। ऐसे कर्मयोगियों में...
Category: मुख्य कॉलम
विमर्श ग्रामीण उपभोक्ता का संपादकीय चेहरा है। यह पत्रिका के वैचारिक पक्ष का प्रतिनिधित्व करता है। इसके अंतर्गत किसी विशेष विषय पर किसी तिथि विशेष का लेख या विचार प्रकाशित किया जाता है। आमतौर पर विमर्श को पत्रिका के संपादकीय के नाम से जाना जाता है।
विमर्श में संबंधित महीने की विशेष समस्याओं या गतिविधियों पर कई लेख होते हैं।
राजपथ ग्रामीण उपभोक्ता का एक विशिष्ट कॉलम है, जो पत्रिका के मूल विषय से थोड़ा हटकर समकालीन राजनीति पर केंद्रित होता है। इसमें समीक्षात्मक लेखों के साथ किसी विश्लेषक के विचार भी शामिल हो सकते हैं।
इस हम्माम में सब नंगे हैं……! राजनीति का मकसद सत्ता और सत्ता का सगा कोई नहीं
दिल्ली का हाल-बेहाल है। दिल्ली की सांसों पर पहरा लगा है। प्रदूषण ने दिल्ली का दम निकाल रखा है। यमुना नदी फेन फेंक रही है। उसे भी सांस लेने में दिक्कत है। दिल्ली की सड़कों पर वाहन रेंग रहे हैं क्योंकि पब्लिक ट्रांसपोर्ट नाकाफी है। दिल्ली में प्रदूषण की गंभीर स्थिति को देखते हुए प्रधानमंत्री...
देश में नई श्रमिक संहिता, 29 कानूनों की जगह 4 लेबर कोड
8 से 12 घंटे रोजाना काम करना जरूरी एक साल में ग्रेच्युटी के हकदार, समयपरवेतन महिलाओंकोकामकेसमानअवसर ओवरटाइमऔरन्यूनतममजदूरीकेनएनियम ………………………………. सरकार ने देश के सभी मजदूरों और कर्मचारियों के लिए एक बड़ा फैसला करते हुए चार नए लेबर कोड लागू किए हैं। पहले जो 29 अलग–अलग श्रम कानून थे, उनमें से जरूरी बातें निकालकर इन्हें अब 4...
राशन कार्ड और गैस सिलेंडर है तो इस खबर को जरूर पढ़ें….
25 दिसंबर से नए नियम लागू नियमों का मकसद पात्र लोगों तक सुविधा को पहुंचाना ……………….. भारत सरकार द्वारा देश के गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों के लिए चलाई जा रही कल्याणकारी योजनाओं में समय–समय पर बदलाव किए जाते हैं। इसी कड़ी में, 25 दिसंबर 2025 से राशन कार्ड और गैस सिलेंडर के इस्तेमाल को लेकर कुछ...
कंज्यूमर इज़ NOT किंग
उपभोक्ता किसी भी अर्थव्यवस्था की रीढ़ होता है। भारत जैसे विशाल और विविधतापूर्ण देश में उपभोक्ता न केवल वस्तुओं और सेवाओं का उपभोग करता है, बल्कि बाजार की दिशा और गुणवत्ता को भी प्रभावित करता है। स्वतंत्रता के बाद भारत में उपभोक्ता संरक्षण को लेकर जागरूकता धीरे-धीरे बढ़ी और समय के साथ मजबूत कानूनी ढांचा...
क्योंकि मैं राजपथ हूं…….
इंट्रो आज ये सब मैं क्यों सुना रहा हूं ? दरअसल मैं सुनाना कुछ नहीं चाहता मैं तो बस चुपचाप, निशब्द साक्षी बनता रहा हूं। इतिहास को खुद में संजोए हूं मैं। भारत के लोकतंत्र का सबसे प्रभावशाली और प्रतीकात्मक मंच रहा हूं मैं। मै सिर्फ कोई एक भौगोलिक मार्ग नहीं, बल्कि सत्ता और जनता,...
डिजिटल मार्केटिंग के नाम पर फैलते गोरखधंधे का जंजाल
लालच के चलते ठगा जा रहा है उपभोक्ता प्रभावी कानून का अभाव भी है एक वजह …………………. पिछले दिनों दिल्ली – एनसीआर के इलाके में डिजिटल मार्केटिंग के नाम पर गोरखधंधा करने वाली कई कंपनियों का पर्दाफाश हुआ। भोलेभाले उपभोक्ता लालच के चक्कर में आकर अपना काफी कुछ गंवा बैठे। वैसे भी साइबर अपराध के...
ओला-ऊबर के बाजार में स्वदेशी ‘भारत ब्रांड लेगा’ इंट्री
सहकारी प्रयासों से होगा कैब सेवा का संचालन मार्केंटिंग के लिए आईआईएम बेंगलुरू का साथ देश की 8 बड़ी सहकारी संस्थाओें ने हाथ बढ़ाया सहकारी कैब कोऑपरेटिव करेगा सेवा का संचालन …………………. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सहकारिता को समृद्धि का रास्ता बताते हुए सहकार से समृद्धि का नारा दिया था। गृह मंत्री अमित शाह को...
कर्ज नहीं, किसान को सक्षमता चाहिए
देश के कई राज्यों में किसानों के कर्ज माफ करने का दौर चल रहा है। कर्ज माफी को लेकर कई जगह किसान आंदोलित भी हैं। उनके आंदोलन को राजनीतिक हवा भी मिल रही है। किसानों की दलील है कि उनकी खेती अब मुनाफे का सौदा नहीं रही। उनके लिए अपनी लागत निकाल पाना भी मुश्किल...
बचत उत्सव और ऑनलाइन कारोबार पर उठते सवाल
देश में 22 सितंबर से जीएसटी सुधारों के दूसरे दौर की शुरुवात हुई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश को संबोधित करते हुए इसे उपभोक्ता हितों के लिहाज से एक बड़ा कदम बताया। उन्होंने जनता से इन सुधारों का फायदा उठाने का आग्रह करते हुए खरीदारी करने का आग्रह किया। प्रधानमंत्री ने इसे बचत उत्सव का...









